शिक्षामित्रों केस में पूर्व सीएम सहित अन्य को पार्टी बनाये जाने की तैयारी

प्रदेश के 1 लाख 75 हजार शिक्षामित्रों को परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक बनाये जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला मंगलवार को आने की संभावना है। एजुकेशन डिपार्टमेंट और प्रदेश सरकार दोनों ही इसकी तैयारी में लग गये है। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बहस पूरी हो चुकी है। shiksha mitra और प्रदेश सरकार ने इस मामले में नमी ग्रामी वकीलों से सुप्रीम कोर्ट में वहस करबाई, जबकि B.ed और BTC कैंडिडेट्स भी मामले में जोर शोर से लगे हुए है। इनका कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलता तब तक न्याय की लड़ाई लड़ते रहेंगे। इनका कहना है कि उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सहित तीन जजों के बेंच के फैसलों को बदलना मुश्किल है, जहां तक मानवीय दृष्टिकोण की बात है तो मामले को बढ़ाने के लिए एवं ऐसी स्थिति बनाने के लिए प्रदेश सरकार एवं बेसिक एजुकेशन डिपार्टमेंट के अधिकारी जिम्मेदार है। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

पूर्व सीएम सहित अन्य को पार्टी बनाये जाने की तैयारी: प्रदेश के पौने दो लाख शिक्षामित्रों को नियम-कानून की अनदेखी कर परिषदीय स्कूलों में assistant teacher बनाये जाने के Allahabad High Court के फेसले के बाद B.ed & BTC मोर्चा अब नयी रणनीति बना रहा है। शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक बनाये जाने के मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविन्द चौधरी, रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन,sachiv basic shiksha parishad को कोर्ट में पार्टी बनाने जा रहा है।

अभ्यर्थियों का कहना है जिस तरह से हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने भर्ती के दौरान बड़े पैमाने गड़बड़ी पर की थी। उसकी जाँच हुई थी। ठीक उसी प्रकार शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाये जाने के मामले में जांच होनी चाहिए। किस तरह से उनको सहायक अध्यापक बनाया था और उनको बचने के लिए सरकारी तंत्र का कैसा दुरप्रयोग किया था। कैसे पब्लिक के टैक्स का पैसा वकीलों और एजुकेशन डिपार्टमेंट के अफसरों पर बहाया गया है। इस मामले में भी इन सभी के खिलाफ केस दर्ज करके कार्रवाई शुरू की जाये एवं पब्लिक के टैक्स के खर्च पैसे की वसूली हो।

शिक्षा विभाग के अफसरों की सांस फूल रही है: सुप्रीम कोर्ट में चल रहे 1 लाख 75 हजार शिक्षामित्रों के मामले में फैसले को लेकर Basic Shiksha Parishad के अधिकारियों एव तत्कालीन सपा सरकार में तैनात एजुकेशन डिपार्टमेंट के अफसरों की भी सांस फूल रही है कि क्या फैसला आने वाला है। यह अधिकारी पूरी तरह से निराश हो गए है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आने की संभावना नही है।

मनवीय दृष्टिकोण को अब यह लोग अपना अंतिम हथियार बना रहे है जबकि शिक्षक भर्ती नियम विरुद्ध हुई है इसको लेकर शिक्षा विभाग का कोई अधिकारी अब आगे नहीं आ रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारिओं को भरोसा है कि शिक्षामित्रों कि संख्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट मानवीय आधार पर इनको मानदेय पर रख सकता है। लेकिन Allahabad High Court के चीफ जस्टिस और फुल बेंच द्वारा दिये गये फैसले को पलट नहीं सकता है। इसलिए वो पूरी तरह से परेशान है।

पढ़ें- Samayojit Shikshak Maintain Unity

Shiksha Mitra Supreme Court Decision

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