फर्जी शिक्षकों से रिकवरी नहीं होने पर कौन जिम्मेदार ?

उत्तर प्रदेश में फ़र्ज़ी शिक्षकों के मामले दिन प्रति दिन निकल कर आ रहे है. विभाग उनसे वेतन रिकवरी की बात कर रहा है लेकिन अभी तक किसी शिक्षक से वेतन रिकवरी यही हो पाई है. विभाग भी इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहा. एक जुलाई को इसी मामले पर बीएसए ने वित्त एवं लेखाधिकारी से अपेक्षित सहयोग न मिलने का रोना रोया और वेतन रिकवरी की गेंद खंड शिक्षा अधिकारियों के पाले डाल दी थी.

अब सवाल यह उठता है कि अगर शिक्षकों से वेतन रिकवरी नहीं हुई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? जिलों में शिक्षकों की नियुक्ति प्राधिकारी बीएसए ही होता है. शिक्षकों के डाक्यूमेंट्स सत्यापन और तैनाती बीएसए कार्यालय से दी जाती है लेकिन वेतन रिकवरी या एफआईआर के लिए गेंद दूसरे पाले में डाली जा रही है.

सिद्धार्थनगर बीएसए के स्टेनो को एसटीएफ़ सितम्बर 2019 में जब गिरफ्तार किया था तो इस खेल उसने को उजागर भी किया था कि फर्जी शिक्षकों की वे एक एनजीओ के पैड पर शिकायत करते हैं और बीएसए कार्यालय से उसका वेतन रोक दिया. फिर उस मामले को दबाने के लिए शिक्षकों से पैसे लिए जाते हैं. देखना अब यह है कि फर्जी शिक्षकों को नियुक्ति देने वाले और उनके डॉक्युमेंट्स के सत्यापन को दबाने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभाग क्या कार्रवाई करेगा.

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