69000 भर्ती में हुई गड़बड़ियों का विरोध करने वालों की लॉकडाउन के चलते दब गईं आवाज़ें

उत्तर प्रदेश में प्राइमरी स्कूलों के लिए होने वाली 69000 शिक्षक भर्ती का अभ्यर्थी कोई विरोध नहीं कर पाए. लॉकडाउन ने परीक्षार्थियों की आवाज दबा दी है. परीक्षार्थियों ने परीक्षा केंद्रों पर बड़े पैमाने पर नकल, सोशल मीडिया पर पेपर वायरल होने का आरोप लगाया था. पेपर लीक प्रकरण में कई लोगो की गिरफ्तारी की गई. इस पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया.

पेपर आउट मामले में नहीं हुई कोई कार्रवाई
भर्ती परीक्षा का आयोजन 6 जनवरी 2019 को हुआ था , परीक्षा वाले दिन ही शिक्षक भर्ती का पेपर लीक होने को लेकर पूरे रज्य में विरोध शुरू हो गया था. एसटीएफ एवं पुलिस ने नकल कराने वाले बड़े गैंग को भी पकड़ा था. कुछ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया. इसके बाद भी इस गैंग का सरगना अभी तक पुलिस की पकड़ से दूर है. न्याय मोर्चा के सुनील मौर्य का कहना है कि पेपर आउट मामले में आज भी कोर्ट में याचिका लंबित है.

परीक्षार्थियों का आरोप है कि एक ही परीक्षा केंद्र से कई परीक्षार्थी सीरीज में अच्छे नंबर से उत्तीर्ण हुए हैं. परीक्षार्थियों ने सरकार से पूरे मामले की जांच की मांग की है, उन्होंने चेतावनी भी दी है कि उनकी सुनवाई नहीं हुई तो कोर्ट जाएंगे. छात्रों ने इन केंद्रों पर पहले भी अनियमितता के आरोप लगाए थे

ओएमआर का मूल्यांकन नहीं हुआ
न्याय मोर्चा के सुनील मौर्या का कहना है कि लगभग नौ हजार परीक्षार्थियों ने साल्व कॉपी मिलने के बाद जल्दबाजी में ओएमआर तो भर दी परंतु वह बुकलेट सीरीज लिखना भूल गए. उनका कहना है कि ऐसा भी हो सकता है कि परीक्षा केंद्रों पर साल्व कराने वालों ने यह कह दिया हो कि चॉकलेट सीरीज बाद में भर देंगे. सुनील का कहना है कि वह इस मामले को आगे ले जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि 40 हजार अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट बिना कारण नहीं चेक की गई

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