वित्तविहीन स्कूलों के 1 लाख 92 हज़ार शिक्षकों को अब मानदेय नहीं मिलेगा

Vitt Vihin Shikshak Mandey : सरकार ने वित्तविहीन स्कूलों के 1.92 लाख से ज्यादा शिक्षकों को मानदेय न देने का का फैसला किया है। सपा सरकार ने चुनावी वर्ष में मानदेय भुगतान के लिए 200 करोड़ का बजट जारी किया था, पर योगी सरकार ने इस मामले में यू-टर्न ले लिया है। संबधित अफसरों को चालू वित् वर्ष के बजट में इस मद राशि का प्रावधान न करने का आदेश दे दिया है।

वर्ष 1986 में यूपी बोर्ड ने  उ.प्र. इंटरमीडिएट अधिनयम 1921 के तहत वित्तविहीन श्रेणी में मान्यता देने का प्रावधान लागू किया। मतलब इन विद्यालयों को संचालित करने के लिए सरकार मान्यता तो देती है, पर इन पर आने वाले किसी भी तरह के खर्च की जिम्मेदारी नहीं लेती है लेकिन प्रबंधन पर शोषण का आरोप लगाते हुए वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षक लम्बे समय से सरकार से  मानदेय देने की मांग कर रहे हैै। वर्ष 2012 के विधानमंडल के चुनाव में सपा सरकार ने इसको अपने घोषणापत्र में शामिल किया था सपा सरकार के बनने के शुरूआती  दिनों में इसे लागू नहीं कर पाई और शिक्षकों के संगठनो ने आंदोलन भी किये थे।

इस पर अखिलेश सरकार ने वित्त वर्ष 2016-2017 में वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों को मानदेय देने संबधी का शासनादेश जारी किया इसके अनुसार वर्ष 2012 की परीक्षा में शामिल हाईस्कूल  और इंटरमीडिएट कॉलेज के शिक्षकों को मानदेय दिया जायेगा  इस तरह से प्रदेश में करीब 17551 वित्तविहीन स्कूलों के 1 लाख 12 हज़ार शिक्षक  घोषणा के लाभ के दायरे में आ गए और इस घोषणा में हायर सेकेंडरी और इंटरमीडिएट के प्रधानाध्यापक को भी शामिल किया गया शासनादेश में यह भी शामिल किया गया कि अंशकालिक शिक्षकों के जीविका को बेहतर करने के उद्देशय से उन्हें विशेष प्रोत्साहन मानदेय देने का फैसला किया गया।

अंशकालिक शिक्षकों के लिए विशेष प्रोत्साहन मानदेय  संस्था  के प्रवंधनतंत्र कि और से किये जा रहे भुगतान से अलग होगा लेकिन योगी सरकार ने खर्चों कि कटौती कि अपनी नीति के तहत भविष्य में उन्हें मानदेय न देने का फैसला ले लिया गया है और चालू वित्त वर्ष के बजट से वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय नहीं मिलेगा। All you need to know ctet exam date.

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