हजारों अभ्यर्थियों की ओर से टीईटी 2017 की परीक्षा को में चुनौती दी गई

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में हजारों अभ्यर्थियों की ओर से UPTET 2017 की परीक्षा को में चुनौती दी गई। जिसमें अभ्यर्थियों की ओर से कुल 316 याचिकाएं दाखिल की गई। इन 316 याचिकाओं में कहा गया गया था कि परीक्षा के बाद घोषित की गई उत्तरमाला में दिए कई जवाब या तो गलत हैं अथवा कुछ प्रश्नों के एक से अधिक जवाब सही हैं। परीक्षा में कुछ प्रश्न आउट ऑफ सिलेबस होने तथा एनसीटीई के गाइडलाइंस के अनुरूप न होने का मुद्दा उठाया गया था। इन याचिकाओं में एनसीटीई के गाइडलाइंस का पूरी तरह उल्लंघन बताया गया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मामले पर विस्तृत सुनवाई करने के दौरान प्रदेश सरकार से दो दिनों में स्पष्ट करने को कहा है कि टीईटी 2017 के रिजल्ट के संबंध में एकल पीठ द्वारा 6 मार्च 2018 को पारित आदेश को क्या वह स्वीकार कर रही है। मामले की अगली सुनवाई 29 मई को होगी।

राज्य सरकार की ओर से दाखिल विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश चीफ जस्टिस गोविंद माथुर व जस्टिस जसप्रीत सिंह की पीठ ने दिया। एकल पीठ ने 6 मार्च 2018 को पारित आदेश में 14 प्रश्नों को गलत, आउट ऑफ सिलेबस व एक से अधिक विकल्पों का सही होना पाते हुए, इन्हें हटाकर पुनर्मूल्यांकन के आदेश दिये थे।

विशेष अपील दाखिल कर सरकार ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती : राज्य सरकार ने एकल पीठ के उक्त आदेश को डिविजन बेंच के समक्ष विशेष अपील दाखिल कर चुनौती दी। प्रदेश सरकार ने अपील में सभी 316 याचिकाओं के याचियों को प्रतिवादी न बनाते हुए, मात्र एक याचिका के याचियों को प्रतिवादी बनाया। डिविजन बेंच ने सरकार की अपील पर एकल पीठ में संशोधन करते हुए, हटाए जाने वाले प्रश्नों की संख्या को कम कर दिया। UPTET 2017

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