आंतरिक जांच के एक अहम बिंदु से उप्र लोकसेवा आयोग कठघरे में

यूपी एलटी ग्रेड परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में उप्र लोकसेवा आयोग आंतरिक जांच के एक अहम बिंदु से कठघरे में है। 50 अभ्यर्थियों की ओर से प्रश्नपत्र खरीदे जाने की जानकारी एसटीएफ के एसएसपी से मिलने के बाद यूपीपीएससी ने उनका विवरण खंगाला तो पाया कि इसमें 29 ने परीक्षा दी। शेष 21 गायब रहे। लेकिन, तीन माह बीत जाने के बावजूद यूपीपीएससी ने परीक्षा में शामिल इन अभ्यर्थियों के खिलाफ न तो स्वयं जांच आगे बढ़ाई और न ही उन्हें कोई नोटिस दी।

ज्ञात हो कि एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती में ‘खेल’ होने की जानकारी एसटीएफ से मिलने के बावजूद यूपीपीएससी ने इसे नजरअंदाज किया। सांविधानिक व स्वायत्त संस्था होने के नाते इस मामले में गंभीरता से जांच की दिशा में स्वयं भी कदम बढ़ाने की बजाए परिणाम के लिए विधिक राय लेना बेहतर समझा। यूपीपीएससी ने इतना जरूर किया कि एसटीएफ से मिली 50 अभ्यर्थियों की सूची पर आंतरिक जांच करते हुए प्रति उत्तर में यह बताया कि इनमें 29 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल रहे और अब कर्मचारी यूनियन को अपनी आवाज बनाकर यूपीपीएससी एसटीएफ की कार्रवाई पर जवाबी हमला कर रहा है कि जब प्रश्नपत्र लीक हुए और इसे अभ्यर्थियों ने 20-20 लाख में खरीदा तो 21 लोगों ने परीक्षा क्यों नहीं दी?

इसके उलट यूपीपीएससी खुद ही इस गड़बड़ी और इसमें शामिल लोगों को बचाने के चलते कठघरे में आ गया है। बड़ा सवाल है कि हंिदूी विषय की परीक्षा में प्रश्नपत्र खरीदने वाले 29 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी तो इनके खिलाफ जांच या नोटिस भेजने की कार्यवाही पर किसकी रोक रही।

यदि यूपीपीएससी यह मानता रहा कि परीक्षा में कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई तो परीक्षा नियंत्रक पर शुरू हुई कार्रवाई के बाद से शासन या अन्य किसी उचित पटल पर लिखित और विधिक रूप से अपना विरोध क्यों नहीं दर्ज कराया?

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