एसटीएफ के रडार पर यूपीपीएससी का बोर्ड भी

प्रयागराज : भर्तियों में भ्रष्टाचार के आरोप से कंठ तक डूबा यूपीपीएससी सीबीआइ जांच के बावजूद अब तक भले ही बचता रहा हो लेकिन, LT Grade Shikshak Bharti में फूटा ‘पेपर लीक’ बम कई बड़ों का संकट बढ़ा सकता है, क्योंकि एसटीएफ की ओर से तीन माह पहले भेजे गए पत्र और भर्ती में भ्रष्टाचार की शिकायत को दरकिनार करने का निर्णय अकेले परीक्षा नियंत्रक नहीं, बल्कि यूपीपीएससी बोर्ड का सम्मिलित रूप से था। इसकी स्वीकार्यता खुद यूपीपीएससी की है। इससे निकट भविष्य में चेयरमैन, सचिव व सदस्य भी जांच की जद में आ सकते हैं।

यूपीपीएससी ने LT Grade Shikshak Bharti 2018 का पहला परिणाम 16 मार्च 2019 को जारी किया था। लेकिन, इस भर्ती में भ्रष्टाचार की गोपनीय शिकायत मिलने पर एसटीएफ के एसएसपी का UPPSC को आगाह करने के लिए पत्र जनवरी में ही आ चुका था। एसटीएफ के सूत्र बताते हैं कि अलग-अलग तीन पत्र भेजे गए थे। एक पत्र में गोपनीय जांच पूरी होने तक भर्ती परिणाम रोकने के लिए कहा गया था।

लेकिन, संवैधानिक संस्था के नाम पर यूपीपीएससी ने इस पत्र को नजरअंदाज किया और विधिक परामर्श लेते हुए परिणाम जारी करना शुरू कर दिया। इसके सात विषयों के परिणाम जारी भी हो चुके हैं। यही मनमानी यूपीपीएससी को काफी भारी पड़ने वाली है। दरअसल एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार होने की जानकारी एसटीएफ के एसएसपी से मिलने के बाद भी उसे नजरअंदाज करने के सहभागी एक तरफ से सभी हैं, क्योंकि यूपीपीएससी बोर्ड की बैठक में अध्यक्षता चेयरमैन, परीक्षा नियंत्रक, सचिव और सदस्यों की उपस्थिति रहती है।

भ्रष्टाचार की जानकारी होने के बाद भी इस बोर्ड की ओर से अनदेखी एसटीएफ को हजम नहीं हो रही है। इससे निकट भविष्य में जांच के दायरे में सभी के आने के आसार हैं।

यूपीपीएससी में गुरुवार को परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार को हिरासत में लेते समय एसटीएफ ने कहा कि इनका वॉयल सेंपल लेना है और कुछ अन्य सवालों पर पूछताछ होनी है। जो कि वाराणसी में ही हो सकती है। देर शाम एसटीएफ ने यूपीपीएससी सचिव को फोन कर परीक्षा नियंत्रक की गिरफ्तारी की औपचारिक जानकारी दे दी। LT Grade Shikshak Bharti

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