उत्तर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा साल में दो बार कराने के आसार

उत्तर प्रदेश में टीईटी परीक्षा को वर्ष में दो बार करने के आसार और भी बढ़ गए हैं। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद इस विषय में पहले ही पहले ही निर्देश जारी कर चुका है, लेकिन वर्षो से प्रदेश में इसका अनुपालन नहीं हो रहा है। टीईटी परीक्षा के गिर होने के परिणाम अभ्यर्थी भी बार-बार परीक्षा का आयोजन चाहते हैं, ताकि अभयर्थी शिक्षक बनने की अर्हता परीक्षा उत्तीर्ण करके दाव सूची कर सकें। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) भी दो बार परीक्षा कराने के सुझाव पर सहमति जता चुकी है। इसके बाद भी दो बार परीक्षा का मुहूर्त तय नहीं पाया गया है।

उत्तर प्रदेश का शिक्षा महकमा निर्देशों के बाद भी टीईटी के आयोजन वर्ष में दो बार नहीं कर पा रहा है। हालांकि एनसीटीई की गाइड लाइन में यह परीक्षा वर्ष में दो बार उपलब्ध कराने के स्पष्ट निर्देश हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि वर्ष में कम से कम एक बार यह परीक्षा जरूर की जाएगी। कुछ महीने पहले एनसीटीई ने देश के सभी राज्यों से टीईटी परीक्षा के साथ ही अन्य शैक्षिक सुधार के संबंध में तमाम सुझाव मांगे थे। इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की बैठक हुई।

इसमें यूपी ने वर्ष में दो बार टीईटी परीक्षा कराने पर सहमति जताई गई है। अफसरों का कहना है कि अभी प्रदेश में दो बार परीक्षा कराने का खाका नहीं खींचा जा चुका है। उधर, अधिकांश युवा भी वर्ष में दो बार टीईटी का आयोजन चाहते हैं। इसकी वजह यह है कि पिछले वर्षो में टीईटी का परिणाम लगातार गिरता रहा है, बड़ी संख्या में युवा उसे उत्तीर्ण नहीं हुए हैं। उनका कहना है कि दो बार परीक्षा होने पर नियमित से उसे उत्तीर्ण करना आसान होगा। वहीं, परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव डाॅ। सुता सिंह ने बताया कि हम लोग वर्ष में दो बार परीक्षा कराने को लेकर सहमत हैं और सुझाव भी दे चुके हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यूपी में सीटीईटी को भी मान लिया गया है, इसलिए दो बार टीईटी करना बहुत जरूरी भी नहीं है। आगे एनसीटीई जो आदेश देगा उसका पालन करेंगे। एनसीटीई पहले ही दे चुकी है निर्देश, एससीईआरटी भी योगदान, तैयारी लगातार गिर रही परीक्षा परिणाम से अभ्यर्थी भी बार-बार चाहते हैं मौका है, इसलिए परीक्षा उत्तीर्ण कर शिक्षक बनने की कर सकते हैं दावत

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