यूपी बोर्ड में तकनीक का भी होगा इम्तिहान

जब आप यह खबर पढ़ रहे होंगे, उसके ठीक एक माह बाद यूपी बोर्ड की परीक्षाएं शुरू होंगी। इस बार परीक्षा से ज्यादा नकल रोकने के लिए होने वाले नवप्रयोगों की चर्चा है। जहां एक ओर 56 लाख से अधिक परीक्षार्थी ज्यादा से ज्यादा अंक पाने की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षा महकमे का पूरा अमला नकलविहीन और सकुशल परीक्षा कराने के लिए युद्धस्तर पर लगा है। परीक्षा केंद्रों की ऑनलाइन निगरानी के लिए एक से बढ़कर एक हाईटेक इंतजाम हुए हैं, कुल मिलाकर नकल रोकने का पूरा जिम्मा तकनीक के भरोसे है। वह जितना कारगर होगी, परीक्षा उतना सफल रहेगी।

यूपी बोर्ड की परीक्षा 18 फरवरी से शुरू होकर छह मार्च तक चलेंगी। हाईस्कूल की परीक्षा 12 दिन (तीन मार्च तक) में पूरी तो इंटर का इम्तिहान 15 दिन तक चलेगा। दोनों परीक्षाओं की अवधि इस बार घटी है, क्योंकि हाईस्कूल 14 दिन व इंटर की परीक्षा 16 दिन चलती रही हैं।

केंद्रों की निगरानी सबसे बड़ी चुनौती : परीक्षा कक्षों में सीसीटीवी कैमरे व वॉयस रिकॉर्डर यूपी बोर्ड में पुरानी बात है। अहम यह है कि 2018 में केंद्रों पर सीसीटीवी लगे, 2019 में सीसीटीवी व वॉयस रिकॉर्डर लगा। अब 2020 में आगे बढ़कर केंद्रों पर ब्राडबैंड व राउटर भी लगवाए गए हैं, ताकि इंटरनेट कनेक्शन होने पर वेब कॉस्टिंग के जरिये केंद्रों की ऑनलाइन मॉनीटरिंग की जा सके। इसमें परीक्षा केंद्र की आइडी व पासवर्ड डालकर हर कमरे का हाल जाना जाना है। प्रदेश मुख्यालय व जिला मुख्यालयों पर कंट्रोल रूम भी तैयार हो रहा है। परीक्षा की नकल रोकने में यह कार्य सबसे अहम व चुनौतीपूर्ण है।

अंक ऑनलाइन अपलोड करने की अंतिम तिथि 31 जनवरी: हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा 2020 के आंतरिक मूल्यांकन (नैतिक योग, खेल एवं शारीरिक शिक्षा) के अंक माध्यमिक शिक्षा परिषद के वेबसाइट पर अपलोड कराने के लिए 31 जनवरी अंतिम तिथि तय की गई है। निर्देश में कहा कि तय तिथि में प्राप्तांक अपलोड न होने पर पूरी जिम्मेदारी प्रधानाचार्यो की होगी।

यूपी बोर्ड ने गर्मी की छुट्टी के बाद पहली जुलाई को परीक्षा कार्यक्रम दिया’ अब तक की गणना में सबसे कम 7786 परीक्षा केंद्रों पर होगा इम्तिहान’ परीक्षा कार्यक्रम के साथ ही रिजल्ट भी 25 अप्रैल तक देने का ऐलान’ उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन अब 15 दिन की जगह सिर्फ 10 दिन में’ परीक्षार्थियों को अंक सहप्रमाणपत्र अंग्रेजी व हंिदूी भाषा में भी मिलेगा’ उत्तर पुस्तिकाओं की ‘ए’ व ‘बी’ कॉपी में लाइनों के रंग अलग होंगे’ अन्य जिलों में क्रमांकित कॉपियां व छह जिलों में सिलाई वाली कॉपी होंगी’ परीक्षार्थी व परीक्षकों की आधारभूत सूचनाएं तेजी से अपडेट कराई जा रही’ अभिभावकों से प्रमाणपत्र लिया गया है और प्रवेशपत्र भी जांचने का निर्देश’ केंद्र बनाने में राजकीय, अशासकीय सहायताप्राप्त बढ़े व वित्तविहीन घटे हैं।

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शासन की मंशा के अनुरूप यूपी बोर्ड की परीक्षाओं को नकलविहीन व शांतिपूर्ण कराने के सतत प्रयास जारी हैं, अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं, जो शेष हैं वे जल्द पूरा होंगे। – नीना श्रीवास्तव, सचिव यूपी बोर्ड उप्र

कंट्रोल रूम से जोड़े गए जिले के सभी परीक्षा केंद्र: हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं को नकलविहीन संपन्न कराने के लिए जिले में जितने विद्यालयों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, उन सभी विद्यालयों की रियल टाइम मॉनीटरिंग के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से जोड़ दिया गया है। 20 जनवरी को दोपहर एक बजे सभी परीक्षा केंद्रों का लाइव वेबकॉस्टिंग के माध्यम से रियल टाइम मॉनीटरिंग का लाइन रन कराते हुए मुख्यालय से देखा जाएगा। इसलिए जिला विद्यालय निरीक्षक आरएन विश्वकर्मा ने सभी केंद्र व्यवस्थापकों को निर्देश दिए हैं कि उक्त तिथि को तय समय पर विद्युत आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था भी रखें। उन्होंने यह भी हिदायत दी है कि यह काम शासन की शीर्ष प्राथमिकता में है, इसलिए इसमें किसी तरह की शिथिलता क्षम्य नहीं होगी और संबंधित के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित कर दी जाएगी।

2016 के हश्र से सहमे अफसर: बोर्ड की 2016 की परीक्षा में स्टूडेंट अटैंडेंस मॉनीटरिंग सिस्टम यानी मोबाइल परीक्षा एप लागू हुआ था। इसमें सभी केंद्र व्यवस्थापकों को एक सिम भी दिया गया था, उन्हें निर्देश था कि जो परीक्षार्थी गैर हाजिर होंगे उनकी रिपोर्ट ऑनलाइन भेजनी होगी लेकिन, यह एप पहले दिन ही धड़ाम हो गया था। कई जगह यह चला ही नहीं तो तमाम जगह नेटवर्क बाधा बना था, तब से बोर्ड ने वेबसाइट पर रिपोर्ट मांग रहा है।

अभी ये तैयारियां अधूरी: बोर्ड इसी माह प्रवेशपत्र मुहैया कराने जा रहा है और प्रश्नपत्र भी भेजेगा। अब तक संवेदनशील व असंवेदनशील केंद्र तय नहीं हुए हैं। हालांकि 433 कालेजों को पहले ही डिबार किया जा चुका है। वहीं, क्षेत्रीय कार्यालयों में अनर्ह परीक्षार्थियों की सूची तैयार नहीं हुई है, केवल मेरठ में करीब साढ़े चार हजार परीक्षार्थियों को बाहर करने की चर्चा है। वहीं, पर्यवेक्षकों की सूची का भी इंतजार है।

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