पदोन्नति नहीं तो कार्यवाहक प्रधानाध्यापक का पद छोड़ने लगे शिक्षक

12 साल से प्रमोशन न मिलने से हताश शिक्षकों ने कार्यवाहक प्रधानाध्यापक पद से इस्तीफा देना शुरू कर दिया है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय लक्षन का पूरा मेजा की कार्यवाहक प्रधानाध्यापिका परमजीत कौर ने खंड शिक्षाधिकारी को पद से इस्तीफा भेजते हुए सहायक अध्यापिका के पद पर कार्य करने की इच्छा जताई है। उनका कहना है कि प्रधानाध्यापक का वेतन न मिलने से वह इंचार्ज हेडमास्टर के पद से इस्तीफा दे रहीं हैं।

प्रयागराज में 9 फरवरी 2009 के बाद नियुक्त शिक्षकों का प्रमोशन नहीं हुआ है। जिसके चलते सैकड़ों प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों के सहारे चल रहा है। अफसर वरिष्ठता के आधार पर शिक्षकों को कार्यवाहक की जिम्मेदारी सौंप दे रहे हैं, भले ही उनकी इच्छा हो या नहीं। सरकार की सभी योजनाओं का क्रियान्वयन करने के साथ ही स्कूल में सफाई से लेकर बच्चों के प्रवेश, शिक्षकों की उपस्थिति आदि खुद देखना पड़ता है।

बच्चों के खाते में मिड-डे-मील की कन्वर्जन कास्ट पहुंचाने से लेकर यूनिफॉर्म सिलाने और जूता, मोजा, बैग, किताबें बांटने का काम प्रधानाध्यापक का है। कार्यवाहक को प्रधानाध्यापक का वेतन न मिलने से बड़ी संख्या में शिक्षक इस जिम्मेदारी को उठाना नहीं चाहते।

इनका कहना है

शिक्षक को दंड तो कार्यवाहक प्रधानाध्यापक का मिलता है लेकिन वेतन या अन्य कोई लाभ उस पद का नहीं दिया जाता। जबकि माध्यमिक विद्यालयों में कार्यवाहक प्रधानाचार्य को इंक्रीमेंट तक मिलता है। जो शिक्षक कार्यवाहक पद छोड़ने का निर्णय ले रहे हैं, वह स्वागत योग्य है।

देवेन्द्र श्रीवास्तव, जिलाध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ

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