28% तक बढ़ा उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों का वेतन

नई दिल्ली : देश भशिर के उच्च क्षण संस्थानों को केंद्र सरकार ने दिवाली का बड़ा तोहफा दिया है। इन संस्थानों में काम करने वाले करीब आठ लाख ज्यादा शिसे क्षकों और दूसरे कर्मचारियों को अब हर महीने 22 से 28 फीसद तक बढ़ा वेतन मिलेगा। इस बढ़ोतरी के बाद सहायक प्राध्यापकों का वेतन अब 47 हजार से बढ़कर 57,700 रुपये होगा, जबकि इन संस्थानों में पढ़ाने वाले वरिष्ठ प्रोफेसर का वेतन 1.46 लाख से बढ़कर 1.82 लाख के करीब हो गया है। कुलपतियों का वेतन 1.75 लाख से बढ़कर 2.25 लाख रुपये हो जाएगा। बढ़ा हुआ वेतन एक जनवरी 2016 से मिलेगा।

पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दी गई है। फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि पिछले कई सालों से केंद्रीय विश्वविद्यालय सहित देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों और राज्य सरकार के अधीन विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ा रहे अध्यापक और कर्मचारी अब तक इससे वंचित थे। इसे लेकर एक कमेटी गठित की गई थी, जिसकी रिपोर्ट के बाद यह फैसला लिया गया है। इसका लाभ केंद्र सरकार के अधीन सभी 106 विश्वविद्यालय और कॉलेज के अलावा राज्य सरकार के अधीन 329 विश्वविद्यालयों को भी मिलेगा। बढ़ा वेतन एक जनवरी 2016 से मिलेगा। इसके तहत अकेले केंद्रीय संस्थानों पर 9800 करोड़ का खर्च आएगा, जो केंद्र अकेले वहन करेगा। राज्यों पर पड़ने वाले भार में भी केंद्र नए फंडिंग पैटर्न के तहत राज्यों को मदद देगा। इस बढ़ोतरी के बाद उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के वेतन में 10,400 से 49,800 रुपए तक की वृद्धि हो जाएगी।

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सिफारिश कम वृद्धि की थी: उच्च शिक्षण संस्थानों को सातवें वेतन आयोग देने के लिए यूजीसी ने काफी समय पहले ही एक कमेटी गठित की थी। पिछले दिनों उसने रिपोर्ट मंत्रलय को दी थी। इसके तहत 18 से 20 फीसद तक वेतन बढ़ाने की सिफारिश की गई थी। इसका विवि के शिक्षक संगठनों ने विरोध भी जताया था। इसके बाद मंत्रलय ने इसकी नए सिरे से समीक्षा करने को कहा था।सिफारिश कम वृद्धि की थी1उच्च शिक्षण संस्थानों को सातवें वेतन आयोग देने के लिए यूजीसी ने काफी समय पहले ही एक कमेटी गठित की थी। पिछले दिनों उसने रिपोर्ट मंत्रलय को दी थी। इसके तहत 18 से 20 फीसद तक वेतन बढ़ाने की सिफारिश की गई थी। इसका विवि के शिक्षक संगठनों ने विरोध भी जताया था। इसके बाद मंत्रलय ने इसकी नए सिरे से समीक्षा करने को कहा था

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