अनोखा स्कूल – एमएनएनआईटी के छात्र चला रहे हैं

संस्कृत के एक श्लोक में विद्या को सभी धनों में प्रधान वह धन बताया गया है, जिसे न तो चोर चुरा सकता है, न राजा छीन सकता है, न ही इसे भादयों में बांटा जा सकता है। इसे वह श्रेष्ठ धन बताया गया है जिसे जितना बांटो, उतना ही बढ़ता है। एमएनएनआईटी से बीटेक-एमटेक करने वाले छात्र जरूरतमंद बच्चों में दिल खोलकर विद्याधन बांट रहे हैं।.

2016 में बीटेक में दाखिला लेने वाले मिर्जापुर के छात्र कनक कुमार अमर ने संस्थान के आस-पास की बस्ती में जाकर गरीब बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। उनके इस प्रयास की जानकारी संस्थान के निदेशक प्रो. राजीव त्रिपाठी को हुई तो उन्होंने इसकी सराहना करते हुए संस्थान में ही बच्चों को बुलाकर पढ़ाने के लिए प्रेरित किया। फिर क्या था संस्थान के प्रशासनिक भवन के सामने स्थित शैक्षिक भवन में शुरू हो गया बच्चों का अनोखा स्कूल।2017 में शुरुआत 20 बच्चों से हुई, संख्या धीरे-धीरे बढ़ते हुए वर्तमान में 250 तक पहुंच गई है। निदेशक ने इन बच्चों के साथ संस्थान के शिक्षक डॉ. बसंत कुमार को भी जोड़ दिया और इस प्रयास को नाम दिया गया है- इज वन, टीच वन। जरूरतमंद बच्चों के लिए कॉपी-किताब, स्टेशनरी आदि का इंतजाम निदेशक प्रो. त्रिपाठी व डॉ. बसंत कुमार करते हैं।.

एक से 12वीं तक की क्लास – इस समय संस्थान से बीटेक, एमटेक, एमबीए, एमएससी कर रहे 50 छात्र बच्चों को पढ़ा रहे हैं। कक्षा एक से लेकर 12वीं तक की क्लास अलग-अलग चलती है। 11वीं, 12वीं के छात्रों की क्लास 5 से 8 बजे तक और बाकी की 6 से 8 बजे तक चलती है। इस अनोखे स्कूल में ज्यादातर बच्चे ऐसे परिवारों के हैं, जो ट्यूशन या अच्छी शिक्षा का खर्च नहीं उठा सकते। कक्षा एक की पढ़ाई कर रही आराधना के पिता ट्राली चलाते हैं। इसी क्लास की जान्हवी के पिता मजदूर हैं तो प्रज्ञा के पिता सब्जी बेचते हैं। इन बच्चों में हीन भावना विकसित न हो इसलिए कुछ अच्छे परिवारों के बच्चों को भी इनके साथ शामिल किया गया है। कनक के साथ ध्रुव कुशवाहा, कल्याण, अनुराग मौर्य, सुमित बनर्जी, लोकेश सिंह भी बच्चों को पढ़ाने की इस मुहिम में पूरे मनोयोग से जुटे हुए हैं।

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