परिषदीय स्कूलों में खेल को बढ़ावा देने के नाम पर ही खेल

  

Basicश्रावस्ती। परिषदीय स्कूलों में खेल को बढ़ावा देने के नाम पर ही खेल हो रहा है। इसके चलते ही 83.55 लाख खर्च कर स्कूलों को खेल किट तो मुहैया करा दी गयी लेकिन किट का उपयोग करने के लिए न तो स्कूलों के पास कोई मैदान मौजूद है और न ही प्रशिक्षण दने वाले खेल शिक्षक। इसी कारण वर्ष 2019 से जिले में परिषदीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन तक नहीं हो पाया है।

परिषदीय विद्यालयों में बच्चों में खेल के प्रति प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए परिषदीय क्रीड़ा प्रतियोगिता का आयोजन होता रहा है। यह प्रतियोगिता स्कूलों से प्रारंभ होकर जिला व मंडल से राज्य स्तर पर जाकर समाप्त होती थी। लेकिन वर्ष 2019 से इस खेल प्रतियोगिता का आयोजन जिले में बंद पड़ा है। खेल प्रतियोगिता को तैयार करने के लिए नियुक्त खेल अनुदेशक व व्यायाम शिक्षक भी अब स्कूलों में ककहरा पढ़ाने लगे हैं।

इसके चलते परिषदीय स्कूलों में खेल का माहौल ही खत्म हो गया है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग अभी भी स्कूलों को विभिन्न खेलों को बढ़ावा देने के नाम पर अनुदान राशि दे रहा है। इसके तहत ही जिले के 1280 परिषदीय विद्यालयों के लिए कुल 83 लाख 55 हजार रुपये खेल किट के नाम पर दिए गए। इस खेल किट का उपयोग कैसे और कहां होगा, इसकी जानकारी न तो विभागीय अधिकारी दे पा रहे हैं और न ही विद्यालयों के शिक्षक। (संवाद)
खेल मैदानों में बन गए क्लास रूम
परिषदीय विद्यालयों में खेल के लिए कोई भी मानक तय नहीं है। जितनी जमीन मिलती है उतने में ही भवन बन कर तैयार हो जाता है। ऐसे में जिन पुराने स्कूलों के पास खेल मैदान थे भी तो वहां धीरे धीरे अतिरिक्त क्लास रूम व सभागार बन कर तैयार हो गए। ऐसे में जहां बच्चों को खेलने की जगह होनी चाहिए थी वहां अब भवन बन कर तैयार हो गए।
स्कूलों में खेल किट के लिए मिलने वाली धनराशि
विद्यालय संख्या प्राप्त धनराशि कुल
प्राथमिक विद्यालय 889 5000 रुपये 44,45,000
उच्च प्राथमिक विद्यालय 391 10,000 रुपये 39,10,000
कुल 1280 83,55,000
स्कूलों में खेल शिक्षकों की स्थिति
परिषदीय स्कूलों में खेल को बढ़ावा देने के लिए 42 अनुदेशक तैनात है। यही नहीं खेल शिक्षक के रूप में 102 शिक्षक की तैनाती हुई थी। इनमें से सभी को विशिष्ट बीटीसी के तहत शिक्षक बना दिया गया। जिले में कई वर्षों से जिला खेल शिक्षक व खंड शिक्षक की तैनाती नहीं हुई है। जिला क्रीड़ा शिक्षक के बतौर ऐसे शिक्षकों की तैनाती की व्यवस्था है, जिनका स्नातक में खेल शिक्षा एक विषय रहा हो या फिर जिन्होंने बीपीएड किया हो। इन्ही में से जिला व खंड शिक्षक की तैनाती की जा सकती है।

जिले में परिषदीय क्रीड़ा प्रतियोगिता 2019 से नहीं हुई है। इसका कारण कोविड कार्यकाल के साथ ही बजट का अभाव है। अब तक यह क्रीड़ा प्रतियोगिता शिक्षक व अधिकारियों के सहयोग से आयोजित होती रही है। -प्रभुराम चौहान, बीएसए

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