69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में विशेष आरक्षण के अभ्यर्थियों को भी लाभ

परिषदीय स्कूलों की 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती की लिखित परीक्षा में सिर्फ ओबीसी को ही राहत नहीं दी है, बल्कि विशेष आरक्षण पाने वालों को भी आरक्षित श्रेणी में रखा गया है। इससे उन्हें परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए 90 अंक हासिल करने होंगे। परीक्षा में अभ्यर्थियों की तादाद को देखते हुए ऐसे आसार हैं कि जारी कटऑफ के आधार पर परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों की संख्या पदों से अधिक होगी। उनका चयन मेरिट बनाकर ही किया जा सकेगा।

परिषदीय स्कूलों की 68500 शिक्षक भर्ती की अपेक्षा इस बार कटऑफ अधिक होने के साथ अलग भी है। शासन ने ओबीसी को आरक्षित वर्ग में रखा है। वहीं, विशेष आरक्षण वाले दिव्यांग व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित को अंकों में राहत दी है। हालांकि उत्तीर्ण प्रतिशत को लेकर अभ्यर्थी हैरान हैं, उन्हें इतने अधिक कटऑफ की उम्मीद नहीं थी। इस बार पदों के सापेक्ष परीक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थियों की तादाद इतनी अधिक है कि तय कटऑफ में भी भर्ती के पदों से अधिक परीक्षा में उत्तीर्ण हो सकते हैं। इसीलिए शासन ने कटऑफ जारी करने के साथ ही स्पष्ट किया है कि परीक्षा उत्तीर्ण करने भर से वे नियुक्ति के हकदार नहीं होंगे, बल्कि अधिक अभ्यर्थी होने पर उनकी मेरिट बनेगी। अफसरों की मानें तो चयन मेरिट बनना लगभग तय है।

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कटऑफ अंक अधिक रखने के पीछे यह भी मंशा है कि पदों से अधिक अभ्यर्थी उत्तीर्ण होने पर वे शांत नहीं बैठेंगे और नियुक्ति की मांग करेंगे। जिस तरह पिछली भर्ती में 6127 अभ्यर्थियों ने हंगामा काटा था। इसीलिए कटऑफ तय करने से पहले इन बिंदुओं पर मंथन हुआ।

शिक्षामित्रों का कोर्ट जाना तय: कटऑफ को शिक्षामित्र कोर्ट में चुनौती देने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि शासन ने परीक्षा बाहर करने के लिए यह कटऑफ तय किया है, जबकि यह भर्ती उन्हीं के खाली पदों के लिए हो रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि कटऑफ परीक्षा के पहले तय होना चाहिए था, हर भर्ती में न्यूनतम अर्हता पहले तय होती है, बीच में नियम नहीं बनाए जाते, ताकि वे उसी के अनुरूप तैयारी करते। बाद में इसे तय किया जाना अभ्यर्थियों के साथ विश्वासघात है। कटऑफ को लेकर विवाद बढ़ना तय माना जा रहा है।

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