69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में दाखिल की स्पेशल अपील याचिका

राज्य सरकार ने प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती के मामले में एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी है। इसके लिए हाईकोर्ट में विशेष अपील याचिका दाखिल कर अंतरिम राहत देने की दरख्वास्त की गई। कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित तक लिया है। सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में सरकार द्वारा क्वालिटी एजुकेशन को आधार बना कर परीक्षा के बाद नए क्वालिफाइंग मार्क्स तय करने के आदेश को रद करने वाले एकल पीठ के फैसले को राज्य सरकार द्वारा विशेष अपील याचिका के जरिए चुनौती देते हुए अंतरिम राहत दिए जाने की अर्जी पर बुधवार को बहस हुई।

इस मामले में पक्षकार याचियों के अधिवक्ता अमित सिंह भदौरिया ने बताया कि न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल व न्यायमूर्ति रजनीश कुमार ने दोनों पक्षों की दलीलें सुने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया। राज्य सरकार की तरफ से इस मामले में महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह पेश हुए। सहायक शिक्षकों के पदों पर भर्ती के इस मामले में हाईकोर्ट लखनऊ की एकल पीठ 29 मार्च 2019 को अहम फैसला सुनाते हुए सरकार द्वारा क्वालिटी एजुकेशन को आधार बना कर परीक्षा के बाद नए क्वालिफाइंग मार्क्स तय करने के आदेश को रद कर दिया था। अदालत ने पुराने क्वालिफाइंग मार्क्स पर परीक्षा के नतीजों को तीन माह में जारी करने के आदेश दिए थे।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 1 दिसंबर 2018 को प्रदेश में 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की थी। इसके लिए 6 जनवरी 2019 को लिखित परीक्षा हुई पर 7 जनवरी को सरकार ने सामान्य वर्ग के लिए 65 व ओबीसी के लिए 60 प्रतिशत क्वालिफाइंग मार्क्स तय कर दिए थे।

सरकार के इस फैसले को दर्जनों याचियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचियों की दलील थी कि एक बार लिखित परीक्षा होने के बाद क्वालिफाइंग मार्क्स तय करना कानून का मंशा के खिलाफ है। वहीं सरकार ने अपने फैसले को जायज ठहराते हुए यह तर्क दिया था कि शिक्षा का मामले में वह मेरिट से समझौता नहीं कर सकती। सरकार की तरफ से अदालत को बताया गया था कि सरकार की मंशा क्वालिटी एजुकेशन देने की है और उसके लिए अच्छे अध्यापकों की आवश्यकता है। इसी वजह से क्वालिफाइंग मार्क्स बढ़ाए गए।

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