एक लाख से अधिक खर्च करने वाली एसएमसी जांच के निशाने पर

  

Basicउन्नाव: जिला बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की समुचित व्यवस्था में शासन से मिले बजट का प्रयोग करवाने की जिम्मेदारी विद्यालयवार बनाई गई एसएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) की है। कमेटी की अगुवाई में ही विद्यालयों के रखरखाव, मध्याह्न भोजन, ड्रेस, बस्ता व अन्य आर्थिक गतिविधियों को पूरा किया जाता है। बीएसए ने इस बाबत खंड शिक्षाधिकारियों के माध्यम से संबंधित एसएमसी का ब्योरा जुटाने के निर्देश दिए हैं। जिन्होंने बीते शैक्षिक सत्र में एक लाख रुपये से अधिक खर्च किया है।

परिषदीय विद्यालयों के पठन-पाठन से लेकर मध्याह्नन भोजन व अन्य सभी व्यवस्थाएं स्कूल के प्रधान अथवा इंचार्ज शिक्षक तो जिम्मेदार होते ही हैं। इनके साथ विद्यालय की अवस्थापना, बच्चों के लिए यूनीफार्म आदि का दारोमदार विद्यालयवार गठित स्कूल प्रबंधन कमेटी पर होता है। स्कूल के शिक्षक बिना एसएमसी अध्यक्ष की अनुमति व संयुक्त हस्ताक्षर के कोई भी कार्य नहीं कर सकते हैं। जिले में विद्यालयवार गठित कुल 2709 एसएमसी हैं। बीएसए जय सिंह ने खंड शिक्षाधिकारी सहित नगर शिक्षाधिकारी को 28 अक्टूबर को दिए अपने आदेश में कहा है कि एक लाख से अधिक खर्च करने वाली एसएमसी के अभिलेखों की वैधानिक जांच करवाएं। यह कार्य आडिट के माध्यम से किया जाता है। जांच उन एसएमसी की होनी है जिन्होंने एक वर्ष पहले 2020-21 में एक लाख रुपये खर्च कर दिए हैं।

पांच फीसद एसएमसी की जांच का है नियम

बीएसए ने जिले की सभी उन एसएमसी के अभिलेखों की वैधानिक जांच के निर्देश दिए हैं। जिन्होंने एक लाख रुपये से अधिक खर्च कर दिए हैं। जबकि नियमत: एक लाख से अधिक खर्च करने वाली एसएमसी में भी महज पांच फीसद के ही अभिलेखों की वैधानिक जांच करवाई जा सकती है।

कोई भी नहीं आता है, इसलिए सामूहिक निर्देश

इस बाबत सहायक लेखाधिकारी अखिलेश मिश्र ने बताया कि वैसे नियम तो पांच फीसद का है, लेकिन इसी की आड़ में कोई भी नहीं आता है। इसलिए सामूहिक निर्देश दिए गए हैं।

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