माध्यमिक स्कूलों में वचरुअल क्लास दूर करेगी शिक्षकों की कमी

सरकारी माध्यमिक स्कूलों में अब शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर नहीं पड़ेगा। नए सत्र से वचरुअल क्लास की सुविधा विद्यार्थियों को दी जाएगी। डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने गुरुवार को इससे संबंधित प्रस्तुतीकरण देखा और अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर जिले में प्रत्येक विषय के कम से कम पांच-पांच शिक्षक ऐसे तैयार किए जाएं जो वचरुअल क्लास प्रतिदिन पढ़ाएं। उन्होंने यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्रों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे, इंटरनेट के लिए राउटर और वॉयस रिकार्डर का प्रयोग नए शैक्षिक सत्र 2020-21 से ऑनलाइन क्लास पढ़ाने में किया जाएगा।

डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जिलों में यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्रों की निगरानी के लिए बनाए जा रहे कंट्रोलरूम को खत्म नहीं किया जाएगा। सभी स्कूलों में कक्षाओं की निगरानी भी अब ऑनलाइन होगी। विद्यार्थियों की कक्षाओं में शत-प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य की जाएगी। जिन स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं पढ़ाने के संसाधन नहीं हैं, उन्हें आगे जुटाया जाएगा। मालूम हो कि माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों के करीब 60 प्रतिशत तक पद खाली हैं। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए बनाए गए केंद्रों पर हर हाल में सीसीटीवी कैमरे, वायस रिकार्डर और राउटर लगाने के निर्देश दिए गए। समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि अभी कुछ परीक्षा केंद्रों पर इंटरनेट की सुविधा के लिए राउटर नहीं लगाया गया है, ऐसे में उसे हर हाल में 15 दिनों में लगाने को कहा गया। बैठक में प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला, माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय कुमार पांडेय आदि मौजूद रहे।

सबसे कम 7786 परीक्षा केंद्र इस बार : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए इस बार सबसे कम 7786 परीक्षा केंद्र ही निर्धारित किए गए हैं। दो वर्षो में करीब साढ़े तीन हजार से अधिक परीक्षा केंद्र कम हुए। दरअसल परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, वायर रिकार्डर और राउटर इत्यादि लगाने से नकल पर प्रभावी नकेल कसी गई है। ऐसे में शिक्षा माफिया हतोत्साहित हुए हैं।

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