शिक्षामित्रों का मुद्दा उच्चस्तरीय कमेटी सुलझाएगी

प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक पद पर तैनात शिक्षकों का समायोजन रद होने के बाद से परेशान शिक्षामित्रों के प्रत्यावेदन विचार करने के लिए सरकार ने एक उच्चस्तरीय कमिटी बनाई है। इस कमेटी के अध्यक्ष कृषि उत्पादन आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा आरपी सिंह होंगे। वहीं इस कमेटी में बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह को सदस्य सचिव बनाया गया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्र संगठनों के नेताओं से वार्ता के दौरान कहा था कि वह अपना सामूहिक प्रत्यावेदन सौंप दें। जिससे उस प्रत्यावेदन पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के दायरे में रास्ता निकला जा सके। शिक्षामित्रों के संगठनों ने इसके बाद अपर मुख्य सचिव बेसिक को अपना मांग पत्र सौंपा था। इस पर विचार करने के लिए बनाई गई कमिटी में प्रमुख सचिव न्याय मुशीर अहमद अब्बासी, प्रमुख सचिव समाज कल्याण मनोज कुमार सिंह और प्रमुख सचिव सूचना अवनीश अवस्थी को भी शामिल किया गया है।

शिक्षामित्रों ने अपने प्रत्यावेदन में सरकार से समाज कल्याण विभाग में संचालित आश्रम पद्धति विद्यालयों के भांति ही वेतन की मांग की थी। इन विद्यालयों में करीब 12 हजार से ज्यादा प्राथमिक शिक्षक हैं, जिन्हें स्थाई के लगभग बराबर वेतन मिलता है। इस बिंदु पर विचार के लिए ही कमिटी में समाज कल्याण के प्रमुख सचिव को रखा गया है। वहीं वेटेज व अन्य छूट की विधि मान्यता व संभावनाओं पर भी कमेटी विचार करेगी।

आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र शाही ने कमेटी में शिक्षामित्र संगठनों के प्रतिनिधियों को भी रखने की मांग की है जिससे उनका पक्ष सही ढंग से आ सके। उनका कहना है कि बेसिक में 2010 से 2011 के बीच में नियुक्त 22 हजार से अधिक ऐसे शिक्षक कार्य कर रहे हैं जो टीईटी पास नहीं है। यह छूट शिक्षामित्रों को भी दी जानी चाहिए।

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