शिक्षामित्र 15 को निकालेंगे मौन जुलूस

लखनऊ अपनी मांगें न माने जाने पर शिक्षामित्रों के संगठन उप दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर झंडारोहण के बाद सभी जिलों में मौन जुलूस निकालने का फैसला किया है। शनिवार को राजधानी के ग्लोब पार्क में संघ की प्रांतीय कमेटी की बैठक में यह फैसला हुआ जिसकी जानकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र यादव ने दी। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी शासन का रुख शिक्षामित्रों के प्रति सकारात्मक नहीं है। शिक्षामित्रों को सह अध्यापकके पद पर समायोजित करने के लिए उन्होंने सरकार से अध्यादेश लाने की मांग की। बैठक में यह भी तय हुआ कि अध्यादेश लाने के लिए शिक्षामित्र 16 अगस्त को भाजपा के मंत्रियों, विधायकों व सांसदों के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजेंगे। वहीं 17 अगस्त को सभी जिलों में भाजपा कार्यालयों में क्रमिक अनशन करने का निर्णय हुआ है।  संगठन के पदाधिकारियों ने कहा है कि यदि राज्य व केंद्र सरकारों ने हमारी मांगें नहीं मानीं तो 25 अगस्त से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर वे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के नेतृत्व में आंदोलन करेंगे।राब्यू, लखनऊ : अपनी मांगें न माने जाने पर शिक्षामित्रों के संगठन उप दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर झंडारोहण के बाद सभी जिलों में मौन जुलूस निकालने का फैसला किया है। शनिवार को राजधानी के ग्लोब पार्क में संघ की प्रांतीय कमेटी की बैठक में यह फैसला हुआ जिसकी जानकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र यादव ने दी।

संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी शासन का रुख शिक्षामित्रों के प्रति सकारात्मक नहीं है। शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित करने के लिए उन्होंने सरकार से अध्यादेश लाने की मांग की। बैठक में यह भी तय हुआ कि अध्यादेश लाने के लिए शिक्षामित्र 16 अगस्त को भाजपा के मंत्रियों, विधायकों व सांसदों के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजेंगे। वहीं 17 अगस्त को सभी जिलों में भाजपा कार्यालयों में क्रमिक अनशन करने का निर्णय हुआ है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा है कि यदि राज्य व केंद्र सरकारों ने हमारी मांगें नहीं मानीं तो 25 अगस्त से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर वे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के नेतृत्व में आंदोलन करेंगे।

शिक्षामित्र आंदोलन: मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद शांत हुए शिक्षामित्र फिर आंदोलन करेंगे। 15 अगस्त को ध्वाजारोहण के बाद शिक्षामित्र सभी जिलों में मौन जुलूस निकालेंगे। 16 अगस्त को क्षेत्रीय सांसद, मंत्री व विधायक को प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन देंगे।

शिक्षामित्रों  में ऊहापोह बरकरार : प्रतापगढ़ : शीर्ष कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षामित्रों के रोजगार की राह अब आसान नहीं रह गई है। नौकरी की उम्र सीमा पार कर चुके शिक्षामित्रों को कोर्ट व सरकार की शर्ते पूरी करना अब आसान नहीं होगा। उनमें अपनी नौकरी को लेकर संशय बरकरार है। वह स्कूल तो जास रहे हैं लेकिन उनका मन बच्चों को पढ़ाने में नहीं लग रहा है। सभी के मन में यही है कि अब उनका भविष्य क्या होगा। नौकरी रहेगी या जाएगी।

कभी जिले में बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने वाले शिक्षामित्रों को अब अपने ही रोजगार को बचाने के लिए दो परीक्षा टीईटी व खुली भर्ती से गुजरना होगा। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है। जिले में करीब 2900 से अधिक शिक्षामित्रों को सपा शासनकाल में अध्यापक बनाया गया था। इसके बाद हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती के नियमों पर खरे न उतरने पर सहायक अध्यापक पद से हटाने का फरमान जारी कर दिया। शर्त रखी कि सरकार यदि चाहे तो उन्हें दो शिक्षक भर्ती तक शिक्षामित्र के रूप में रख सकती है और भर्ती में वेटेज व आयु सीमा में छूट दे सकती है।

शीर्ष कोर्ट का फैसला आने के बाद 26 जुलाई से शिक्षामित्र आंदोलन करने करने लगे। आठ दिन आंदोलन चलने के बाद मुख्यमंत्री से वार्ता हुई और 15 दिन का समय लेते हुए उन्होंने अगले आदेश तक पुन: उसी स्कूल में उसी पद पर कार्य करने के लिए कह दिया। सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार अब शिक्षामित्रों को पहले टीईटी पास करने वे दो भर्तियों को उत्तीर्ण करने की शर्त रखी गयी है। इसे उन्हें नियत समय में पूरा करना होगा। इसके बाद ही शिक्षामित्रों के रोजगार की आस पूरी हो सकेगी।

25 जुलाई के बाद वेतन को लेकर असमंजस : कोर्ट के आदेश के बाद बेसिक शिक्षा सचिव ने शिक्षामित्रों को 25 जुलाई तक का वेतन देने का आदेश दिया है। इसके बाद के वेतन को लेकर शिक्षामित्रों में असमंजस बरकरार है कि उसके बाद उन्हें कौन सा वेतन मान मिलेगा। 1सरकार के रुख को लेकर शिक्षामित्रों में मायूसी है। सरकार ने अभी तक उनके भविष्य को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है। मुख्यमंत्री द्वारा दी गई समय सीमा भी बीतने को है। बीएसए बीएन सिंह ने बताया कि 25 जुलाई तक का शिक्षामित्रों को वेतन देने का निर्देश सचिव ने दिया है। शासन का जो भी आदेश होगा उसका पालन कराया जाएगा।

चुनौती बड़ी और समय कम : सरकार द्वारा नम्बर माह में टीईटी परीक्षा का आयोजन की बात कही गई है। शिक्षामित्र कैसे पढ़ेंगे इसको लेकर भी वे खासे परेशान है। एक तरफ स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दूसरी तरफ रोजगार को लेकर खुद को टीईटी की परीक्षा के लिए तैयार करना होगा वह भी महज दो माह में। चुनौती बड़ी है और समय कम। अब देखना है यह है कि कैसे वह इस चुनौती का सामना कर सकेंगे।

क्यूंकि आदेशानुसार यदि दो भर्ती के बाद वे इसमें उत्तीर्ण न हुए तो उन्हें शिक्षामित्र पद से भी हाथ धोना पड़ जाएगा। शिक्षामित्रों को आस थी कि शायद उनके रोजगार को लेकर कोई हल निकले लेकिन बीते 10 अगस्त को शासन स्तर पर हुई बैठक में उनके लिए ऐसी राहत न मिल सकी जिससे उनका रोजगार बिना टीईटी के बना रहे। मानदेय का पद भी नियत समय में समाप्त कर दिया जा सकता है।

अध्यादेश लाए सरकार : रीना : आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की प्रांतीय सचिव एवं जिलाध्यक्ष रीना सिंह ने कहा ढलती उम्र में शिक्षामित्रों के लिए सरकार को चाहिए कि वह अध्यादेश लाकर उनकी नौकरी सुरक्षित करे। ऐसा न होने पर संगठन दिल्ली तक आंदोलन करेगा।

उधर संयुक्त समायोजित शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सत्येंद्र शुक्ल ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की।

फीस के बिना नहीं रुकेगी पढ़ाई : फीस के अभाव में लड़कियों की पढ़ाई बाधित नहीं होने पाएगी। इसका प्रयास अखिल भारतीय मां सरस्वती साहित्यिक संस्थान ने किया है। इसके द्वारा आयोजित निबंध प्रतियोगिता विषय बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर प्रतिभा के बल पर चयनित छह छात्रओं की वार्षिक फीस अदा करने की पहल की गई।

बेल्हा देवी परिसर में रविवार को एक व्यक्ति-एक बेटी राष्ट्रीय शैक्षिक अभियान के तहत कवि डा. दयाराम मौर्य रत्न, आनंद मोहन ओझा, डा. सुधांशु उपाध्याय, अमित श्रीवास्तव, समित श्रीवास्तव और संस्था अध्यक्ष ओम प्रकाश श्रीवास्तव पंछी ने सहयोग किया। इसमें चयनित बेटियों कृतिका श्रीवास्तव, शिवानी सिंह पटेल, ज्योति गुप्ता, अनुष्का द्विवेदी, अक्शा नाज और खुशी तिवारी का भविष्य संवरेगा। आभार अमित श्रीवास्तव ने जताया।

वित्तविहीन शिक्षकों की सेवा को होगा आंदोलन : माध्यमिक शिक्षक संघ वित्तविहीन शिक्षकों की सेवा नियमावली बनाए जाने एवं समान कार्य के लिए समान वेतन दिलाने के लिए आंदोलन करेगा। इसके लिए प्रांतीय नेतृत्व ने कमर कस ली है। प्रत्येक जनपद मुख्य

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