सियासी जमीन पर शिक्षामित्रों के मुद्दों की धमक

2011 में तत्कालीन बसपा सरकार ने राज्य में में 2001 से 2010 तक संविदा पर नियुक्त किये 1.70 लाख शिक्षामित्रों को आरटीई एक्ट के तहत दूरस्थ विधि से दो वर्षीय बीटीसी कराने का निर्णय लिया था। इसके बाद सत्ता परिवर्तन हुआ और सपा सरकार सत्ता में आई इस सरकार ने शिक्षामत्रों को सहायक शिक्षक के पद पर समायोजित करने का निर्णय लिया। इनको Teacher Eligibility Test से छूट दी गई। इसी आधार पर 2015 में और जुलाई, 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इनके समायोजन को अवैध घोषित कर दिया। जिससे शिक्षामित्रों का मनोबल टूट गया था। जिसे शिक्षामित्रों के सामने समस्या पैदा हो गई। अब shiksha mitra सरकार से अपने लिए स्थायी नौकरी की मांग कर रहे हैं।

आरटीई एक्ट लागू होने के बाद 2014 में 33 हजार अनुदेशक आरटीईटी एक्ट के तहत रखे गये। इनको 8470 रुपये मानदेय दिया जाता है। हालांकि केन्द्र सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत इनका मानदेय बढ़ा कर 17 हजार रुपये कर दिया है लेकिन प्रदेश सरकार इनको अभी भी पुराना मानदेय देती है। हमारे पक्ष में भाजपा के लगभग 4 दर्जन सांसदों और विधायकों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखा लेकिन हमें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। अब हमको ठोस कार्रवाई चाहिए। – जितेन्द्र शाही,प्रदेश अध्यक्ष, आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन

प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों को दीं ये सहूलियतें

  • 1.70 लाख शिक्षामित्रों में से लगभग 25 हजार शिक्षामित्र टीईटी पास कर शिक्षक बन चुके हैं।
  • उप मुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री योगी ने शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान के लिए जुलाई 2018 को हाईपावर कमेटी बनाई थी। इस समिति में प्रमुख सचिव न्याय अध्यक्ष तथा अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा और प्रमुख सचिव गृह शामिल थे। शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान पर इस कमेटी को अपनी रिपोर्ट देनी थी।
  • प्रदेश सरकार ने जुलाई 2017 में इनका समायोजन रद्द होने के बाद शिक्षामित्रों का मानदेय 3500 हजार से बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया।
  • शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक दिये जाने की व्यवस्था की गई। प्रतिवर्ष की सेवा का 2.5 अंक और अधिकतम 25 अंक शिक्षक भर्ती की मेरिट सूची में जोड़े जाएंगे।
  • शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्रों को सेवानिवृत्ति की आयु तक मौका देने की व्यवस्था की
  • और भी हैं मुद्दे लेकिन दलों को नहीं आते याद-
  • प्रदेश में सरकारी इंटर कॉलेजों की संख्या कम, निजी स्कूलों के भरोसे शिक्षा व्यवस्था
  • सहायताप्राप्त स्कूलों में शिक्षकों के लगभग 50 फीसदी पद रिक्त
  • सरकारी प्राइमरी स्कूलों में शिक्षा का निम्न स्तर
  • व्यावसायपरक कोर्स मौजूद लेकिन रोजगार नहीं
  • निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम नहीं
  • यूपी में इंजीनियरिंग कॉलेजों की भरमार लेकिन गुणवत्ता पर सवाल, इसलिए नहीं मिल रही नौकरियां

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