यूपी बोर्ड परीक्षा-कक्ष निरीक्षकों का चयन विभाग के लिए चुनौती

यूपी बोर्ड परीक्षा 2020 के लिए कक्ष निरीक्षकों का चयन फिर शिक्षा विभाग के लिए चुनौती होगा। क्योंकि सरकारी विद्यालयों में करीब 3500 शिक्षक हैं और 112 परीक्षा केंद्रों में करीब 1.5 लाख विद्यार्थियों के लिए कक्ष निरीक्षकों की आवश्यकता छह हजार है। ऐसे में एडेड और वित्त विहीन शिक्षकों की मदद लेना शिक्षा विभाग की मजबूरी है।

बीते सालों में ऐसे ही शिक्षकों के कारण सबसे अधिक परीक्षा के दौरान अव्यवस्थाएं होने के साथ ही परीक्षा की सुचिता भंग होती है। इनके सत्यापन में काफी खामियां होती हैं। जिसके कारण केंद्रों पर नकल कराए जाने एवं परीक्षा के बीच में इनका एकाएक ड्यूटी छोड़ देने पर परेशानी होती हैं। क्योंकि निजी विद्यालयों के शिक्षक आवेदन के समय अपनी शैक्षिक योग्यता में गलत विषयों की जानकारी देते हैं। ऐसा पूर्व की बोर्ड परीक्षाओं में भी देखा जा चुका है। वहीं, डीआइओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह का कहना है कि निजी विद्यालयों के शिक्षकों की कक्ष निरीक्षक ड्यूटी में पूरी पादर्शिता बरती जाती है। अगर कोई गलत सूचना उनके द्वारा दी जाएगी तो उसपर कड़ी कार्रवाई होगी।

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अबतक निजी विद्यालयों के 200 शिक्षकों के हुए आवेदन : परीक्षा कार्यालय में अबतक 20 निजी विद्यालयों के करीब 200 शिक्षकों ने कक्ष निरीक्षकों के लिए आवेदन किया है। गत वर्ष की सूची से भी कक्ष निरीक्षकों की छटनी की जा रही है।

माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या साढ़े तीन हजार, जरूरत है छह हजार की

बीते सत्र प्रकाश में आए मामले

’ मलिहाबाद के खड़ौहां स्थित जनता इंटर कॉलेज में बेटा परीक्षा दे रहा था वहीं, वित्तविहीन शिक्षक पिता की कक्ष निरीक्षक के रूप में ड्यूटी थी।’ मोहनलालगंज के जिस कॉलेज में पिता जिस स्कूल में प्रिंसिपल था वहां बेटी परीक्षा दे रही थी। सीसी कैमरे भी बंद मिले थे। ’ 12 फरवरी को सरोजनीनगर स्थित हीरालाल यादव बालिका इंटर कॉलेज में 371 विद्यार्थी थे और 19 कक्ष निरीक्षकों में देरी से पहुंचे। ’ सैकड़ों वित्तविहीन शिक्षकों ने रिलेशन सर्टिफिकेट ही सत्यापन के दौरान नहीं जमा किया था।

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