विद्यालयों में मानक के मुताबिक शिक्षक नहीं, कैसे हो पढ़ाई?

उत्तर प्रदेश सरकार का पूरा ध्यान छात्रों के लिए बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने पर है, लेकिन प्रदेश के कई जिलों के माध्यमिक विद्यालय ऐसे है जिनमें पर्याप्त संख्या में अध्यापक नहीं है। इन स्कूलों में संबंधित विषयों के शिक्षकों की भारी कमी चल रही है, जिसके कारण एक ही शिक्षक कई विषयों की पढ़ाई करा रहे हैं। यह समस्या ज़्यदातर ग्रामीण इलाकों के सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में हैं, जहां दो-चार शिक्षकों के भरोसे पूरा विद्यालय चल रहा है। जबकि अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू होने वाला है, ऐसे में इस बार भी इस शैक्षिक सत्र में भी शिक्षकों की कमी बनी रहेगी।

अगर नियम के अनुसार इन माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति होती है तो 35 छात्रों पर एक शिक्षक की नियुक्ति होनी चाहिए, लेकिन कई जिलों के स्कूलों में इस नियम का पालन नहीं हो पा रहा है, जिसकी वजह से स्कूलों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। छात्रों को गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल रही है। करछना के बेनीपुर स्थित परमेश्वरदीन मिश्र इंटर कॉलेज में करीब 1000 विद्यार्थियों पर मात्र चार शिक्षक हैं। यहीं के बेलसारा में गांधी इंटर कॉलेज में मात्र दो शिक्षक करीब 700 विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। यही हाल हंडिया के आमीपुर धनुपुर स्थित सरयु प्रसाद इंटर कॉलेज का है, जहां करीब 900 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए चार शिक्षक हैं। यहीं धनुपुर के इमामगंज स्थित जनता इंटर कॉलेज में करीब 1200 विद्यार्थियों को मात्र आठ शिक्षक पढ़ा रहे हैं। इन सभी विद्यालयों में विज्ञान, गणित, अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की कमी है। हिंदी, सामाजिक विज्ञान, कला आदि विषयों के शिक्षक विद्यार्थियों को अन्य विषय पढ़ा रहे हैं।

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