शिक्षक भर्ती में शून्य और एक मिलने वाले अंकपत्र सोशल मीडिया पर वायरल

प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बच्चो का भविष्य सवारने की आस में जिन बीटीसी और बीएड अभ्यर्थियों ने शिक्षक भर्ती परीक्षा दी थी, उसमें तमाम अभ्यर्थी फेल हो गए है। शिक्षक बनाने वाली इस लिखित परीक्षा में बहुत से अभ्यर्थी तो खाता तक नहीं खोल पाए और किसी को एक अंक से संतोष करना पड़ा। कई अभियर्थीओं तो अपनी शून्य और एक मिलने वाले अंक पत्र को सोशल मीडिया पर वायरल करके पूछ रहे है कि यह कैसे संभव है। जबकि, परीक्षा में 33 से अधिक प्रश्नों के दस से अधिक जवाब सही माने गए हैं। लिखित परीक्षा के मूल्याकंन में गड़बड़ी का आरोप लगाकर सैकड़ों अभ्यर्थियों ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने उत्तरपुस्तिका की जाँच पर अब सवाल खड़े करते हुए इस हाई कोर्ट में चुनौती देने की कह रहे है।

68500 सहायक अध्यापको कि भर्ती के लिए लिखित परीक्षा 27 मई आयोजित की गई थी और इसका रिजल्ट 13 अगस्त को जारी किया गया था। 107873 अभ्यर्थी इस परीक्षा में बैठे थे। उनमें से 41556 अभ्यर्थी ही उत्तीर्ण हो सके। सामन्य और ओबीसी के लिए कट ऑफ़ 45% और एससी और एसटी के 40% रखी गई थी।

सोमवार को अभ्यर्थिओं ने जैसे विभाग की वेबसाइट पर अपना रिजल्ट देखा तो कई के तो होश उड़ गये। अभ्यर्थी सविता कुमार को 150 में से 1 अंक वही जिरका अंसारी को शून्य मिला। प्रदेश के कई अभ्यर्थी है जिनको 0 से 10 के बीच नंबर मिले है।

यूपी टीईटी का रिजल्ट आने के बाद प्रश्नों के जवाब पर हंगामा हुआ था। मामला कोर्ट तक पहुंचा गया था। इस बार सहायक शिक्षक भर्ती के रिजल्ट पर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जिस परीक्षा में 33 से अधिक प्रश्नों के दस से अधिक जवाब सही माने गए हैं। उसमें कोई अभ्यर्थी शून्य या फिर एक अंक कैसे पा सकता है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने परीक्षा की कार्बन कॉपी दिखाते हुए कहा कि उन्हें 122 अंक मिलना चाहिए था लेकिन, रिजल्ट में महज 22 अंक मिले हैं। अभ्यर्थी मूल्यांकित कॉपियां दिखाने की मांग कर रहे हैं।

कंपियों की दोबारा जाँच संभव नहीं: शिक्षक भर्ती के 9 जनवरी के शासनादेश में कंपियों की दोबारा जाँच करने का नियम नहीं है। नए सिरे से उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन आदि करने के लिए अभ्यर्थी पत्राचार भी नहीं कर सकते। कहा जा रहा है कि आपत्तियां अभ्यर्थिओं से पहले ही ले ली गई थी और संसोधित उत्तरकुंजी जारी कि गई है

सरकार परीक्षा का मखौल न उड़ाएं: बीएड अभ्यर्थियों ने शिक्षक भर्ती में पांच फीसदी अंक घटाने की पहल पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सरकार परीक्षा का मखौल न उड़ाए, बल्कि अगली शिक्षक भर्ती में एनसीटीई के निर्देश का अनुपालन करके बीएड अभ्यर्थिओं को मौका दे, 95 हजार या फिर से अधिक सीटें आसानी से भरेंगी।