उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की सुस्ती से अभ्यर्थियों के मंसूबों पर पानी फिरा

प्रयागराज : उप्र उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की सुस्त कार्यप्रणाली अभ्यर्थियों के मंसूबों पर पानी फेर रही है। एक भर्ती पूरी करने में काफी समय लग रहा है। भर्ती प्रक्रिया लंबी खिंचने से रोजगार की आस में बैठे युवाओं को आर्थिक, शारीरिक व मानसिक परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थिति यह है कि चयन होने के बाद नियुक्ति के लिए महीनों भटकना पड़ता है। नाराज अभ्यर्थियों ने उच्च शिक्षा व डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा को पत्र लिखकर आयोग की कार्यप्रणाली में सुधारने के लिए कदम उठाने की मांग की है।

उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग मौजूदा समय अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कॉलेजों के असिस्टेंट प्रोफेसर पद की भर्ती करा रहा है। 1150 पदों का विज्ञापन 2016 में निकाला गया। इसके तहत 35 विषयों के असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति होनी है। लिखित परीक्षा 15 दिसंबर 2018, पांच व 12 जनवरी 2019 को हुई। अभी तक 34 विषयों की लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित हो चुका है। लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों का साक्षात्कार 29 जुलाई से चल रहा है। इसमें 31 विषयों के 550 पदों का परिणाम घोषित हुआ है। लेकिन, काउंसिलिंग न होने से किसी चयनित को नियुक्ति नहीं मिली। वहीं, असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती पूरी न होने से विज्ञापन संख्या 48 के तहत प्राचार्यो के 290 पदों की भर्ती रुकी है, जबकि दिसंबर में प्राचार्य पद के अभ्यर्थियों की लिखित परीक्षा कराने की समयसीमा तय थी। इसके साथ ही असिस्टेंट प्रोफेसर पद के दूसरे विज्ञापन रुके हैं।

निरंतर लिया जाए साक्षात्कार

अभ्यर्थी विवेकानंद कहते हैं कि आयोग साक्षात्कार के बीच में लंबा अंतराल देता है। जो अनुचित है, साक्षात्कार की प्रक्रिया नियमित होनी चाहिए। जिसे विषय का साक्षात्कार शुरू हो उसे खत्म करने के बाद ही अंतराल लिया जाए।

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