विभाग की ओर से अब तक 30 बर्खास्त शिक्षकों के खिलाफ अलग-अलग थानों में एफआइआर दर्ज

फर्जी दस्तावेज लगाकर परिषदीय विद्यालयों में नौकरी हासिल करने वाले बर्खास्त शिक्षकों के खिलाफ बेसिक शिक्षा विभाग ने अब शिकंजा और कस दिया है। विभाग की ओर से अब तक 30 बर्खास्त शिक्षकों के खिलाफ अलग-अलग थानों में एफआइआर दर्ज कराई जा चुकी है। सभी बर्खास्त शिक्षकों के खिलाफ एफआइआर दर्ज होने के बाद उनसे वेतन रिकवरी की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

वर्ष 2010 के बाद से जिले के परिषदीय स्कूलों में नौकरी करने वाले ऐसे 65 शिक्षकों की सेवा पिछले वर्ष समाप्त कर दी गई थी, जिन्होंने फर्जी अंकपत्र, डिग्री, जाति व निवास प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी प्राप्त कर ली थी। इसमें से एक शिक्षक ऐसा था, जिसके पिता शिक्षक नहीं थे लेकिन उसने फर्जी तरीके से मृतक आश्रित कोटे में नौकरी पा ली थी।

इन विश्वविद्यालयों की ज्यादा डिग्रियां मिली थीं फर्जी : विभागीय छानबीन में पता चला था कि फर्जी डिग्रियां ज्यादातर डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (आगरा), बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (झांसी), बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल (मध्य प्रदेश) और लखनऊ विश्वविद्यालय की थीं। बर्खास्त शिक्षकों में से चार ने कोर्ट की शरण ली है। ऐसे में कोर्ट से मामले के निस्तारण तक इन चारों शिक्षकों के खिलाफ एफआइआर दर्ज होने में संशय है। खंड शिक्षा अधिकारियों की ओर से कुल 30 बर्खास्त शिक्षकों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई गई है।

एसआइटी की जांच में भी पकड़े गए थे तीन शिक्षक : वशेष जांच दल (एसआइटी) की जांच में भी इसी में से तीन शिक्षक फर्जी प्रपत्रों के आधार पर नौकरी प्राप्त करने में संलिप्त पाए गए थे। तीनों ने डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से वर्ष 2005 में बीएड की फर्जी डिग्री ली थी।

किस विकास खंड में कितने शिक्षकों पर दर्ज हुआ मुकदमा
मेजा सात बहरिया सात
मांडा चार उरुवा चार
हंडिया दो

फूलपुर

दो
जसरा दो

करछना दो

फर्जीवाड़ा में बर्खास्त सभी शिक्षकों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने की कार्रवाई चल रही है। एफआइआर दर्ज होने के बाद वेतन रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। -संजय कुमार कुशवाहा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।

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