नौ महीने बाद आई किताब बांटने की याद

लखनऊ : सीबीएसई की तर्ज पर आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार ने मदरसों में दीनी तालीम के साथ एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू करने का फैसला किया था, लेकिन शहर के सैकड़ों मदरसा छात्र-छात्रओं को पुराने पाठ्यक्रम से ही पढ़ाई करनी पढ़ रही है।

शैक्षिक सत्र शुरू होने के नौ महीने बीतने के बाद अब शहर के मदरसों को एनसीईआरटी की किताबें बांटने की तैयारी है। किताबों की खेप आ चुकी हैं। इनमें हंिदूी, अंग्रेजी, सामान्य ज्ञान व विज्ञान सहित अन्य विषय की किताबें हैं। गोमती नगर स्थित मदरसा वारसिया में दो ट्रक किताबें रखी हैं, जिनका वितरण सोमवार से शुरू होगा। शहर के 18 अनुदानित मदरसों को निश्शुल्क किताबें वितरित की जाएगी। मदरसे में बच्चों की संख्या और उनके पाठ्यक्रम के आधार पर किताबें वितरित होंगी। जबकि गैरअनुदानित मदरसों को पैसा खर्च कर किताबें खरीदनी होगी। शहर में फौकानिया, तहतानिया व आलिया स्तर के करीब 131 मदरसे हैं।

कोर्स पूरा करने के लिए करनी होगी मशक्कत : मदरसा छात्र-छात्रओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्र शुरू होने से पहले एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू करने को मंजूरी दी थी। अगले सत्र से नया पाठ्यक्रम लागू होना था, लेकिन सत्र बीते नौ महीने बीतने के बाद जिम्मेदारों को अब किताबें बांटने की याद आई। शहर के किसी भी मदरसे में नए पाठ्यक्रम की किताबें तक नहीं पहुंची थी। देरी से किताबें मिलने से एक ओर जहां छात्र-छात्रओं को बचे सत्र में पूरा पाठ्यक्रम खत्म करने के लिए मशक्कत करनी होगी, तो वहीं शिक्षकों के लिए भी यह किसी चुनौती से कम नहीं होगा। शैक्षिक सत्र अप्रैल 2019 से मार्च 2020 तक हैं। मार्च से पहले मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं भी होनी हैं।

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