परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने पांच साल की वैधता की समय सीमा खत्म कर दी राहत

  

प्रयागराज : शासन के बीती 16 जून के आदेश के संदर्भ में परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। टीईटी पास करने के पांच साल के भीतर नियुक्ति न मिलने पर फिर से टीईटी पास करने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। अब यूपीटीईटी प्रमाण पत्र आजीवन मान्य होगा। इससे अब तक सफल करीब 21 लाख अभ्यर्थियों में से नौकरी न पाने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा से राहत मिल गई है।

प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक भर्ती के लिए वर्ष 2011 से शिक्षक पात्रता परीक्षा शुरू की गई थी। तब से सिर्फ वर्ष 2012 और कोरोना संक्रमण के कारण 2020 में यह परीक्षा नहीं हो सकी। अब तक प्राथमिक विद्यालय के लिए करीब 12 लाख और उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए करीब नौ लाख अभ्यर्थी इसमें सफल हो चुके हैं। नियुक्ति न पाने वाले 2016 व उससे पहले टीईटी कर चुके अभ्यर्थियों को पांच साल की अवधि पूरी होने जाने के कारण दोबारा परीक्षा देनी पड़ती, लेकिन अब इससे राहत मिल गई है।

परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव संजय उपाध्याय ने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा प्रमाण पत्र अब आजीवन मान्य किए जाने के फैसले से सोमवार को सचिव बेसिक शिक्षा परिषद, सभी उप शिक्षा निदेशकों, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान एवं सभी बीएसए को अवगत करा दिया है।

इस फैसले के चलते टीईटी कर चुके लाखों अभ्यर्थियों के अब इस परीक्षा में शामिल न होने से नए अभ्यर्थियों को ज्यादा फायदा होगा। इस तरह इस परीक्षा में अभ्यर्थी भी कम शामिल होंगे, जिससे परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय पर भी परीक्षा में अधिक अभ्यर्थी होने का दबाव घटेगा।

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