एडेड अल्पसंख्यक कालेजों में भर्ती प्रक्रिया वैध

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट एक्ट के रेग्युलेशन 17 चैप्टर द्वितीय में किए गए संशोधन को वैध करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह संशोधन अल्पसंख्यक विद्यालयों को अनुच्छेद 30 के तहत मिले प्रबंधन के अधिकार का उल्लंघन नहीं करता। कोर्ट ने प्राइवेट एजेंसी से लिखित परीक्षा से अल्पसंख्यक विद्यालयों में अध्यापक भर्ती का रास्ता साफ कर दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल व न्यायमूर्ति राजीव मिश्र की खंडपीठ ने नेशनल इंटर कालेज शिकारपुर बुलंदशहर सहित 32 अन्य याचिकाओं को खारिज करते हुए दिया है। राज्य सरकार ने इस संशोधन के जरिए व्यवस्था दी है कि सरकारी वित्तीय सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक विद्यालयों के अध्यापकों की भर्ती में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के निर्देशन में प्राइवेट एजेंसी के द्वारा लिखित परीक्षा लेकर मेरिट के आधार पर भर्ती की जाएगी। प्राइवेट एजेंसी भर्ती प्रक्रिया पूरी करके मेरिट के आधार पर शिक्षा अधिकारियों के मार्फत कालेज के प्रबंध समिति को चयनित अभ्यर्थियों का नाम भेजेगी। फिर चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रबंध समिति करेगी।

कोर्ट ने कहा कि प्राइवेट एजेंसी से लिखित परीक्षा कराकर अल्पसंख्यक वित्तीय सहायता प्राप्त कालेजों में अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया पारदर्शिता पूर्ण व पक्षपात रहित है। यह प्रक्रिया छात्रहित व जनहित के साथ राष्ट्र हित में भी है। कोर्ट ने कहा कि अध्यापकों की भर्ती मामले में सरकार किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं कर रही है। अभी तक विद्यालयों की प्रबंध समिति साक्षात्कार के जरिये अपने अध्यापकों की नियुक्ति करती रही है। कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति का अधिकार प्रबंध समिति को होगा। चयन प्रक्रिया सरकारी निर्देशन में प्राइवेट एजेंसी द्वारा पूरी की जाएगी और चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए अग्रसारित किया जाएगा, जिन्हें नियुक्त करने का प्रबंध कमेटी को पूरा अधिकार होगा।

याचिकाओं में उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम रेग्युलेशन 17 चैप्टर 2 व 20 मार्च 2018 को जारी अधिसूचना की वैधता को चुनौती दी गई थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि संयुक्त शिक्षा निदेशक के निर्देशन में प्राइवेट एजेंसी द्वारा लिखित परीक्षा कराना और मेरिट लिस्ट तैयार कर नियुक्ति के लिए प्रबंध समिति को अग्रसारित करना, अनुच्छेद 30 के अंतर्गत अल्पसंख्यक विद्यालयों को मिले अधिकारों में किसी प्रकार से हस्तक्षेप नहीं है।

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