उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की प्राचार्य पद की भर्ती विवादों में घिरी

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की प्राचार्य पद की भर्ती विवादों में घिर गई है। विज्ञापन संख्या-49 के तहत निकली इस भर्ती में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियम व निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगा है। यही नहीं, आयोग के एक सदस्य की पत्नी के प्राचार्य पद में अभ्यर्थी होने की बात भी कही जा रही है।

आगरा खंड शिक्षक क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य डॉ.आकाश अग्रवाल ने यह आरोप लगाते हुए उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री व डिप्टी सीएम डा.दिनेश शर्मा को पत्र लिखकर मामले की जांच और उचित कार्रवाई कराने की मांग की है। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने प्राचार्य की 290 पद की भर्ती निकाली है। साक्षात्कार के लिए 610 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। एमएलसी आकाश का आरोप है कि प्राचार्य पद के अभ्यर्थियों को मनमाने तरीके से अनर्ह घोषित किया गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्राचार्य पद के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में 15 वर्ष का अनुभव आवश्यक किया गया है, लेकिन आयोग ने ऐसे अनुभव वाले अभ्यर्थियों को अनर्ह कर दिया है। लिखित परीक्षा में कोई कटऑफ घोषित नहीं किया। बिना कटऑफ निर्धारित किए प्रमाण पत्रों का सत्यापन व साक्षात्कार करना कानून के विरुद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के एक सदस्य की प}ी ने प्राचार्य पद के लिए आवेदन किया है। उनके प्रमाण पत्रों का सत्यापन 15 मार्च को किया गया है। उस दौरान सदस्य भी मौजूद थे, जबकि नियमानुसार उन्हें ऐसी प्रक्रिया में भाग नहीं लेना चाहिए। वहीं, आयोग की सचिव डॉ.वंदना त्रिपाठी ने सारे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सारी प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की गई है। आयोग इस मामले में उचित समय पर जवाब देगा।

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