स्कूलों में ‘बच्चों’ की सुरक्षा पर उठे सवाल

  

स्कूलों में पढ़ने जा रहे मासूम बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। राजधानी में कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं जिसमें छात्रओं के साथ यौन शोषण व छेड़खानी की गई, लेकिन इससे बचाव के कोई इंतजाम न तो बेसिक शिक्षा ने किए न ही स्कूल प्रशासन चेता। नतीजतन फिर रायबरेली रोड पर स्थित एक निजी स्कूल में केजी की छात्र के साथ वहां के कर्मचारी ने यौन शोषण किया। घर से अपने लाड़ले-लाड़ली को तैयार कर स्कूल वालों के भरोसे पढ़ाई के लिए भेजने वाले अभिभावकों का भरोसा भी टूट रहा है। आखिर मोटी फीस लेने वाले स्कूलों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम क्यों नहीं किए जाते। शिक्षा विभाग के अधिकारी पुलिसिया कार्रवाई को ही काफी मानकर पीछे हट जाते हैं। अभिभावक कल्याण संघ ने ऐसे स्कूलों के प्रबंधतंत्र के खिलाफ भी कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि स्कूलों में मासूम सुरक्षित रहें।

राजधानी में पिछले एक वर्ष में स्कूल में यौन शोषण व छेड़खानी के करीब चार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। एक स्कूल में छात्र ने वाइस प्रिंसिपल पर छेड़खानी का आरोप लगाया। एक स्कूल में छात्र के साथ शिक्षक ने दुष्कर्म किया और एक स्कूल में छात्र के साथ शिक्षक ने छेड़खानी की। इन सभी मामलों में पुलिस ने अपने स्तर पर जो कार्रवाई की उसी से शिक्षा विभाग संतुष्ट हो गया। एक नोटिस तक उसने प्रबंधतंत्र को भेजने की जहमत नहीं उठाई कि आखिर सुरक्षा की क्या व्यवस्था रही?

प्रवीण मणि त्रिपाठी कहते हैं कि ऐसी घटनाओं में पुलिस द्वारा जांच की जाती है, लेकिन फिर भी वह स्कूल से जवाब-तलब करेंगे। इधर अभिभावक कल्याण संघ के अध्यक्ष पीके श्रीवास्तव कहते हैं कि स्कूलों में सुरक्षा के मानक जांचे जाएं। कक्षाओं व प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और हर कीमत पर सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखी जाए, ताकि आगे इस तरह की घटना न हो। ज्यादातर स्कूल नेताओं के होने के कारण कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। स्कूलों का मकसद सिर्फ और सिर्फ पैसा कमाना होता है। सरकार फीस नियमन के साथ-साथ सुरक्षा को लेकर भी कड़ा कानून बनाए, ताकि कैंपस में यौन शोषण व अपराध न हों।

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