चालू वित्त वर्ष के मुकाबले छात्रवृत्ति और छात्रवेतन में बड़ी कटौती का प्रस्ताव

लखनऊ। वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में चालू वित्त वर्ष के मुकाबले छात्रवृत्ति और छात्रवेतन में बड़ी कटौती का प्रस्ताव है। जबकि वाहनों की खरीद, पेट्रोल-डीजल, भूमि खरीद, टेलीफोन और सब्सिडी में आवंटन बढ़ने जा रहा है। हालांकि मेहमाननवाजी में खर्च घटाने की योजना है। प्रदेश सरकार विभिन्‍न शैक्षिक कार्यक्रमों के अंतर्गत छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवेतन पर बड़ा खर्च करती रही है। पिछले वित्त वर्ष में 5060 करोड़ रुपये इस मद में वास्तविक रूप से खर्च किए गए थे। चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने आवंटन बढ़ाया और 5115 करोड़ रुपये खर्च की व्यवस्था की। पर आगामी वित्त वर्ष में इस मद में 20.85 प्रतिशत कटौती करते हुए 4,048 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव है। इससे छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति घटने के आसार हैं। इसी तरह मानदेय के रूप में होने वाले खर्च में भी 9.64 प्रतिशत कमी की योजना है।

हालांकि विभिन्‍न मदों में दी जाने वाली सब्सिडी 10 फीसदी से अधिक बढ़ाने का प्रस्ताव है। इनमें कई विभागों की सब्सिडी में वृद्धि की योजना है तो कई में कटौती हो रही है। कृषि में लगभग 11 फीसदी, लघु उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन में 122 व हथकरघा में 64 फीसदी की वृद्धि का प्रस्ताव है तो भारी एवं मध्यम उद्योग की सब्सिडी में 32 फीसदी, ग्राम्थ विकास में 17 और पशुधन में 48 फीसदी कटौती की योजना है। सरकार ई-ऑफिस को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में कागजों व छपाई सामग्री के प्रयोग कम होने की उम्मीद है। ज्यादातर विभागों में यह व्यवस्था लागू है। कैबिनेट व बजट तक पेपरलेस करने की पहल हो गई है। लेकिन कार्यालय में उपयोग किए जाने वाली फॉर्म की छपाई व लेखन सामग्री के मद में 20.37 प्रतिशत वृद्धि की योजना है। इसी तरह कार्यालयों को चलाने के लिए डाक खर्च, सज्जा की खरीद, जनरेटर व डीजल पर खर्च और मशीनों व उपकरणों के रखरखाव आदि मद में चालू वित्त वर्ष की अपेक्षा 90.38 प्रतिशत तक वृद्धि की योजना है।

विकास को मिलेगी रफ़्तार : सरकार योजनाओं ब परियोजनाओं के लिए भूमि के अधिग्रहण व भूमि की खरीद पर बड़ा खर्च करती है। चालू वित्त वर्ष में इस मद में 2416 करोड़ रुपये का प्रावधान है। मगर 11,631 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया वित्त वर्ष 2021-22 में इस मद में है। प्रदेश में कई बड़े इन्फ्रास्ट्रकचर प्रोजेक्ट चल रहे हैं। आवंटन में बड़ी वृद्ध से विकास योजनाओं के लिए जमीन की व्यवस्था आसानो से की जा सकेगी। इसके लिए पैसे की कमी आड़े नहीं आएगी।

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