उप्र लोक सेवा आयोग की पीसीएस 2019 परीक्षा की उल्टी गिनती शुरू

उत्तर प्रदेश राज्य के प्रशासनिक पदों पर चयन करने वाली उप्र लोक सेवा आयोग की पीसीएस 2019 परीक्षा की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। पीसीएस की परीक्षा काफी कठिन होती है। यूएपी पीसीएस 2019 की डगर और भी मुश्किल भरी मानी जा रही है। क्योकि इसकी छोटी-बड़ी कई वजह है। इस परीक्षा की सबसे बड़ी वजह है इस बार की पीसीएस परीक्षा में पदों की कम संख्या और आयोग द्वारा प्रति पद सफलता दर में की गई कमी है। इसी वजह से पीसीएस प्री 2019 की मेरिट पिछली परीक्षाओं की तुलना में काफी हाई रहेगी।

पीसीएस प्री में 309 पद घोषित किए गए हैं, 15 दिसंबर को परीक्षा होनी है। पीसीएस प्री का रिजल्ट घोषित होने से पूर्व शासन से इस संवर्ग के जितने रिक्त पदों की जानकारी मिलती है, उसे उस समय की भर्ती में शामिल कर लिया जाता है। 2019 की मुख्य परीक्षा 20 अप्रैल को प्रस्तावित है इसलिए आयोग को जनवरी के अंत या फरवरी के मध्य तक प्री का रिजल्ट जारी करना होगा। पीसीएस 2020 के लिए मार्च या अप्रैल में आवेदन भी शुरू होने की संभावना है। इसी कारण से पीसीएस 2019 में पदों की संख्या बढ़ने की संभावना काफी कम है।

आयोग ने प्री में प्रति व्यक्ति सफल होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या 18 से घटाकर 13 कर दी है। 309 पदों के सापेक्ष 4017 परीक्षार्थी मुख्य परीक्षा के लिए सफल होंगे जबकि 18 गुना पर यह संख्या 5562 होती। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव का सीधा असर पीसीएस प्री की मेरिट पर पड़ेगा। इसलिए इस यह परीक्षा पिछली परीक्षाओं की तुलना में काफी कठिन मानी जा रही है।

पीसीएस 2016 और 2017 दोनों की प्री परीक्षा में प्रश्नों को लेकर विवाद सामने आया था। हाईकोर्ट ने दोनों रिजल्ट संशोधित करने का आदेश दिए था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट से आयोग को मिली थी। नए अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार इस तरह के विवाद से बचते हुए सिविल सेवा परीक्षा की तरह पीसीएस परीक्षा को निर्विवाद कराने के लिए प्रयासरत हैं। सूत्रों का कहना है कि संघ लोक सेवा आयोग से जुड़े नए विशेषज्ञों की पीसीएस प्री का पेपर तैयार करने में मदद ली जा रही है। जाहिर है कि इसका असर प्री के पेपर पर पड़ेगा। माना जा रहा है कि इस बार का पीसीएस पेपर पिछली परीक्षाओं से अलग प्रकृति का होगा। इसलिए भी यह परीक्षा पिछली परीक्षाओं से भिन्न और कठिन मानी जा रही है।

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