परिषदीय विद्यालयों के आधे बच्चे इस बार भी न बगैर जूते-मोजे के रह जाएं

  

प्रयागराज : कहीं ऐसा न हो कि परिषदीय विद्यालयों के आधे बच्चे इस बार भी बगैर जूते-मोजे के रह जाएं, क्योंकि शासन की ओर से भेजे गए जूते-मोजे ज्यादातर बच्चों के पैरों में फिट नहीं बैठ रहे हैं। हालांकि, जिले के 20 विकास खंडों में से सिर्फ नौ के लिए अभी जूते-मोजे आए हैं। यह मुद्दा शनिवार को मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अरविंद कुमार सिंह की बैठक में उठा था।

30 सितंबर 2018 के आंकड़े के मुताबिक जिले में करीब 4.14 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें से प्रत्येक बच्चे को शासन की ओर से एक जोड़ी जूते और दो जोड़ी मोजे दिए जाते हैं। इस बार नौ विकास खंडों के बच्चों के लिए जूते-मोजे आ चुके हैं। बाकी 11 विकास खंडों के लिए अभी आने शेष हैं। बच्चों की साइज को लेकर भले समस्याएं आ रही हैं, लेकिन अधिकारी दावा कर रहे हैं कि तीन श्रेणियों (कक्षा एक से दो, कक्षा तीन से पांच और कक्षा छह से आठ) में अलग-अलग जूते-मोजे मंगाए जाते हैं, जिससे वह छोटे नहीं होते हैं।

पिछले सत्र में नगर क्षेत्र के 50 फीसद ही बंटे थे जूते-मोजे: नगर क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की संख्या करीब 7.5 हजार है। सूत्र बताते हैं कि पिछले शैक्षिक सत्र में साइज की समस्या के मद्देनजर लगभग 50 फीसद बच्चों को ही जूते-मोजे बंट सके थे। बचे जूते-मोजे शासन को वापस नहीं किया जा सकता है, इसलिए उसे डंप कर दिया गया था। बहरहाल, कहा जा रहा है कि जिन बच्चों को वह जूते-मोजे हो जाएंगे, उन्हें इस बार वितरित कर दिया जाएगा। पिछले वर्ष एक ब्रांड कंपनी के जूते-मोजे होने के बावजूद गुणवत्ता ठीक न होने की भी बात कही जा रही है।

जूते-मोजे साइज के हिसाब से छोटे नहीं होते हैं। ब्लॉक संसाधन केंद्रों (बीआरसी) के स्तर पर उनकी छंटाई हो पाने में दिक्कत के कारण यह समस्या आती है। लेकिन इस बार पहले से पूरी सतर्कता बरती जा रही है। इसलिए समस्या नहीं होगी। संजय कुमार कुशवाहा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।

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