टीचर एसोसिएशन ने जेबीटी शिक्षकों की डयूटी गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाने का किया विरोध

हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन ने प्रदेश में जेबीटी शिक्षकों की डयूटी गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाने का विरोध किया है। परिवार पहचान पत्र के आय के सर्वे में ड्यूटी लगाने, बीएलओ व अन्य गैर शैक्षणिक कार्यों में ड्यूटी लगाने की शिकायत हरियाणा सरकार को भेजी है। शिक्षक की ड्यूटी विद्यालय में पढाना है। गैर शैक्षणिक कार्यों की ड्यूटी लगाने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है। Haryana Primary Teacher एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष हरीओम राठी व प्रदेश कोषाध्यक्ष चतर सिंह ने बताया कि हरियाणा में सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में जेबीटी शिक्षकों की परिवार पहचान पत्र की आय के सर्वे में ड्यूटी लगाई गई है।

प्रदेश में लगभग एक वर्ष बाद प्राइमरी स्कूल खुले हैं, प्रदेश भर के शिक्षक कोविड काल में बच्चों की शिक्षा को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए मेहनत से बच्चों को पढा रहे हैं। ऐसे समय में शिक्षकों की परिवार पहचान पत्र के आय के सर्वे, बीएलओ व अन्य कार्यों में ड्यूटी लगाना बच्चों के हितों पर कुठाराघात है, इससे शिक्षा विशेषकर प्राथमिक शिक्षा का स्तर रसातल में चला जाएगा। दूसरी ओर प्रदेश भर के निजी विद्यालय भी खुले हैं। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की गैर शैक्षणिक कार्यों में ड्यूटी लगाना परोक्ष रुप से निजी विद्यालयों की मदद है। इस वर्ष राजकीय स्कूलों में नामांकन में भारी वृद्धि हुई है। प्रदेश भर में सरकारी स्कूलों में पढने वाले बच्चों व अभिभावकों का विश्वास शिक्षकों की ड्यूटी गैरशैक्षणिक कार्य में लगाने से उठ जाएगा। उन्होंने कहा कि इस समय शिक्षकों की ड्यूटी परिवार पहचान पत्र के आय के सर्वे से वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि शिक्षा विभाग व हरियाणा सरकार ने ऐसा नहीं किया तो हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन प्रदेश भर में शिक्षा विभाग व हरियाणा सरकार के खिलाफ आंदोलन करने के लिए विवश होगा।

अध्यापकों ने आर्थिक सर्वे की ड्यूटी का किया बहिष्कार
पलवल के अध्यापकों ने अध्यापक तालमेल कमेटी के बैनर तले, परिवार पहचान पत्र के तहत आर्थिक सर्वे तथा आय सत्यापन करने की ड्यूटी को लेकर दी जा रही ट्रेनिंग का पूरी तरह से बहिष्कार किया।

अध्यापकों को संबोधित करते हुए अध्यापक नेता हरिचंदवर्मा, वेदपाल,सोहनलाल पूनिया, गीतेश कुमार,भारतदहिया वीरसिंह सौरोत और सुरेंद्रकुमार ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण स्कूल पिछले लगभग 11 महीने से बंद थे। इस दौरान बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया गया, लेकिन गरीब बच्चों पर न तो एंड्रॉयड फोन थे और ना ही नेट की सुविधा थी। परीक्षाओं के लिए केवल एक महीना मुश्किल से शेष है । इस दौरान इन बच्चों के लिए अध्यापकों का कक्षा में होना अति आवश्यक है ताकि विद्यार्थी कुछ ना कुछ सीख सकें। लेकिन प्रशासन ऐसे महत्वपूर्ण समय में अध्यापकों को प्रतिदिन नए-नए गैर शैक्षणिक कार्य सौंप कर कक्षाओं से दूर करना चाहता है, जोकि सरासर गलत है और इन बच्चों के लिए अन्याय पूर्ण है । आय सत्यापन का कार्य बहुत ही मुश्किल कार्य है,जिससे अध्यापकों के लिए बच्चों के लिए समय निकालना संभव नहीं होगा। इसके अलावा प्रशासन ने अन्य तरह की ड्यूटियां भी सौंपी हुई हैं। शिक्षा के अधिकार कानून के तहत भी गैर शैक्षणिक कार्यों में अध्यापकों की ड्यूटी नहीं लगाई जा सकती । अध्यापकों ने फैसला किया है कि वे गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए हर प्रकार के गैर शैक्षणिक कार्यों का विरोध करेंगे । इस मौके पर जय गोपाल शास्त्री,दिनेश, गिर्राज सिंह उधम सिंह रामवीर ,गणेश, दारा सिंह, राजेश, प्रमोद, यादराम,नरेंद्र मोहन सिंह और हिम्मत चौहान आदि ने भी संबोधित किया।

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