7429 परिषदीय स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक भरोसे

  

शिक्षा शिक्षा को लेकर विभिन्न मंचों से जताये जाने वाले सरोवाद के बीच एक कड़वी सच्चाई यह है कि प्रदेश के 7429 परिषदीय विद्यालय विद्यालय के शिक्षकों के भरोसे संचालित हैं। इन स्कूलों में विभिन्न श्रेणियों के बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी सिर्फ एक शिक्षक पर है। पिछले महीने स्कूल चलो अभियान की हकीकत जानने वाली केंद्र सरकार की ओर से आये झा समीक्षा रिव्यू मिशन के सामने सूबे में बेसिक शिक्षा की यह पासवर्डह तस्वीर उजागर हुई है।

विडंबना यह है कि जहां एक तरफ 7429 परिषदीय सकूल सिर्फ एक शिक्षक के हवाले हैं, वहीं प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में छात्र संख्या के अनुपात में 65,597 शिक्षक ज्यादा तैनात हैं। सूबे के 47,483 यानी 42 प्रतिशत परिषदीय प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं जिनमें छात्र-शिक्षक अनुपात 1:35 के मानक से ज्यादा है। इन स्कूलों में एक शिक्षक पर 35 से ज्यादा बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है। वहीं प्रदेश के 6950 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात मानक से अधिक है। प्रदेश के 87 फीसद उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा के अधिकार के मानकों के अनुसार विषयों के शिक्षक नहीं हैं।

लखनऊ में राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक में इन तथ्यों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए मिशन ने परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती में असमानता से निपटने के लिए उनमें नए सिरे से शिक्षकों की तैनाती करने का सुझाव दिया है। चूंकि शिक्षक दूरस्थ क्षेत्रों में तैनाती से बचते हैं, इसलिए मिशन ने ग्रामीण इलाकों में शिक्षकों की तैनाती की न्यूनतम अवधि तय किये जाने के साथ सुदूरवर्ती क्षेत्रों में तैनात अध्यापकों को प्रोत्साहन देने की सिफारिश की है। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा राज प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षकों की तैनाती में असमानता से निपटने के लिए सरकार स्थानांतरण नीति बना रही है। स्थानांतरण नीति को लागू करते समय इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि स्कूलों में जरूरत के मुताबिक शिक्षकों की तैनाती हो।

ये हैं मानक : नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के मुताबिक कक्षा एक से पांच तक में दाखिल 60 बच्चों पर दो, 61 से 90 बच्चों पर तीन, 91 से 120 बच्चों पर चार, 121 से 200 बच्चों पर पांच शिक्षक होने चाहिये। जिन स्कूलों में डेढ़ सौ से अधिक बच्चे हैं वहां पांच शिक्षकों के अलावा एक हेड टीचर भी होना चाहिये। जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 200 से अधिक हो, वहां छात्र-शिक्षक अनुपात 40 से अधिक नहीं होना चाहिये। वहीं कक्षा छह से आठ तक के स्कूलों में विज्ञान, गणित, सामाजिक अध्ययन और भाषा का एक-एक शिक्षक अवश्य होना चाहिये।

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