शिक्षा में खेल, 132 बच्चे नहीं जा रहे स्कूल

जिले में कोई भी बच्चा न तो कूड़ा कचरा बीनता है और न होटलों में काम करता और न ही घरेलू नौकर है। मात्र 132 बच्चे ऐसे हैं जो विद्यालय नहीं जाते। उनमें से भी 101 अन्य किसी कारण से। 20 गंभीर बीमारी और मात्र दो बच्चे गरीबी के चलते विद्यालयों से दूर हैं। यह सुनने में अटपटा ही नहीं लग रहा बल्कि यह असंभव है, पर बेसिक शिक्षा विभाग का हाउस होल्ड सर्वे यही बता रहा है। आंकड़ेबाजी से हकीकत पर पर्दा डालकर खामियां छिपाई जा रही हैं। हाउस होल्ड सर्वे में तो कुल सात लाख 82 हजार 393 बच्चों में से सात लाख 82 हजार 561 बच्चे विद्यालय जा रहे हैं, लेकिन हकीकत आंकड़ों की पोल खोल रही है।

बच्चों के लिए शिक्षा अनिवार्य है और हर बच्चे का विद्यालय में प्रवेश हो यह सुनिश्चित करने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत हाउस होल्ड सर्वे कराया जाता है और इसमें हकीकत पर पर्दा डाल दिया जाता है। शैक्षिक सत्र 2017-18 के हाउस होल्ड सर्वे के अनुसार जिले में छह से 14 वर्ष के बच्चों में चार लाख 13 हजार 770 बालक और तीन लाख 68 हजार 923 बालिकाएं हैं। उनमें से बालकों में चार लाख 13 हजार 698 और तीन लाख 68 हजार 863 बालिकाएं विद्यालय जा रही हैं।

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हाउस होल्ड सर्वे में विभाग ने जिन 132 बच्चों के विद्यालय न जाने का जिक्र किया है। उसमें से 101 अन्य कारण, 20 गंभीर बीमारी और दो गरीबी के चलते स्कूल नहीं जाते हैं और नौ बच्चे अपने घरेलू कार्य के चलते स्कूलों से दूर हैं। वैसे हाउस होल्ड सर्वे के आंकड़े सही हैं, लेकिन सैकड़ों बच्चे होटलों पर काम कर रहे इसके जवाब में उनका कहना है कि अगर कहीं कोई खामी है तो उसकी जांच कराई जाएगी।मसीहुज्जमा सिद्दीकी, बीएसएआंकड़े ही की पोल खोल रहे हैं।

आंकड़ों में ही खुल रही खेल की पोल : विद्यालयों से तैयार होने वाले यू डायस डाटा में गत शैक्षिक सत्र से इस वर्ष 46 हजार से अधिक बच्चे विद्यालयों से दूर हुए हैं, लेकिन हाउस होल्ड सर्वे में 10 हजार 559 बच्चे स्कूलों से कम हुए हैं। सर्वे के अनुसार गत शैक्षिक सत्र 2016-17 में सात लाख 93 हजार 165 बच्चे स्कूल जाते थे लेकिन 2017-18 के सर्वे में सात लाख 82 हजार 561 बच्चे स्कूल जाते दिखाए गए हैं। अब आंकड़े दोनों विभाग के ही हैं लेकिन कौन सही हैं यह तो जिम्मेदार ही बता सकते हैं लेकिन पोल जरूर खोल रहे हैं।

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