शिकायत मिलने पर बीएसए ने बांटे गए स्वेटरों का सैंपल जांच के लिए भेजा

लखनऊ : हठ कर बैठा चांद एक दिन माता से यह बोला। सिलवा दो मां मुङो ऊन का मोटा एक ङिांगोला..अपनी मां से चांद का यह हठ कविता के रूप में तमाम लोगों ने पढ़ा होगा। वहां तो मां की मजबूरी जायज थी कि चांद का आकार रोज बदलता है, तो उसका ङिांगोला कैसे सिलाया जाए। यह तो हुई चांद की बात, लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ने तमाम मां के चांद उस ङिांगोले (स्वेटर) से ठंड मिटाने का प्रयास कर रहे हैं जो भ्रष्टाचार से फंदों से बुना हुआ है।

किसी के स्वेटर कसे हैं तो किसी के आस्तीन तक नहीं आते। सिलाई खुली, ऊन उधड़ा और स्वेटर के छेदों से आर-पार होती हवा। यह दर्द है सरोजनीनगर ब्लाक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय घुसवल में पढ़ने वाले छात्र अमर, राधा गौतम, सुहानिका का। पार्वती तो फटा स्वेटर पहने बैठी थी। सोमवार को स्कूल खुलने पर दैनिक जागरण की टीम के निरीक्षण में बच्चों को घटिया स्वेटर बांटे जाने का खुलासा हुआ। यही हाल काकोरी के पूर्व माध्यमिक अमेठिया सलेमपुर का है। यहां कक्षा आठ में पढ़ने वाले छात्र आकाश ने बताया कि उन्हें जो स्वेटर मिला वह बायीं ओर बांह से फटा हुआ है। शुभी, साजिया, रुकइया, अजय खान और कक्षा छह के छात्र ऋषि को छोटा स्वेटर मिला। ऐसे तमाम स्कूलों में घटिया क्वालिटी के स्वेटर दिए गए हैं।

कई कंपनियों के खिलाफ हो चुकी है कार्रवाई : लुधियाना की केके मिल्स कंपनी टेंडर फाइनल होने के बाद सप्लाई नहीं दी थी। तत्कालीन डीएम कौशलराज शर्मा ने कंपनी पर रिपोर्ट दर्ज कराई और ब्लैक लिस्ट भी कराया गया। एक अन्य कंपनी को टेंडर मिला वह भी समय से सप्लाई नहीं कर पाई। बीते माह कानपुर की एनएन इंडस्ट्रीज तय समय पर स्वेटर नहीं वितरित कर पाई है। इसके खिलाफ डीएम अभिषेक प्रकाश ने कार्रवाई की थी। उसके बाद फरीदाबाद की कंपनी को टेंडर मिला। जिनके स्वेटर छोटे और फटे हुए थे।

कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में बांटे गए फटे स्वेटर। गर्दन के पास टैग काटकर लगाया गया दूसरा टैग ’ जागरण

‘दो कंपनियों के खिलाफ पूर्व में ही कार्रवाई हो चुकी है। तीसरी कंपनी फरीदाबाद की है जो स्वेटर बांट रही थी। उसने स्वेटर छोटे बांटे हैं। स्वेटर सैम्पल कानपुर स्थित लैब में टेस्टिंग के लिए भेजे गए हैं।’- डॉ. अमरकांत सिंह, बीएसए

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