इस बार अपना आठ साल पहले बना रिकार्ड तोड़ने जा रहा है यूपी बोर्ड

यूपी बोर्ड इस बार अपना आठ साल पहले बना रिकार्ड तोड़ने जा रहा है। कोरोना महामारी के विकट दौर में यह होना लगभग तय है। सिर्फ मुख्यमंत्री की औपचारिक अनुमति का इंतजार है। इसी बीच उत्तराखंड व मध्य प्रदेश सरकार ने इंटर की परीक्षा रद करने का ऐलान कर दिया है। कहा जा रहा है कि यूपी भी इसी रास्ते पर चलेगा। परीक्षार्थियों की संख्या के लिहाज से दुनिया के सबसे बड़े यूपी बोर्ड ने 2013 की इंटरमीडिएट परीक्षा में सर्वाधिक सफलता प्रतिशत का रिकार्ड बनाया था, जबकि इस बार इंटर की परीक्षा रद होने से सभी परीक्षार्थियों को प्रमोट होने का अवसर मिल सकता है।

कोरोना जैसी महामारी हर सदी में एक बार आती रही है। पिछली महामारी स्पेनिश फ्लू बताई जाती है। हालांकि उस समय 1918 में यूपी बोर्ड अस्तित्व में ही नहीं था। इसीलिए बोर्ड के 100 वर्ष के इतिहास में हाईस्कूल व इंटर की परीक्षाएं निरंतर होती रही हैं। यह जरूर है कि परीक्षाओं के माह समय के अनुरूप बदलते रहे हैं। अब पहली बार हाईस्कूल की परीक्षा रद हो चुकी है और इंटर का इम्तिहान रद होने के मुहाने पर है। प्रधानमंत्री ने सीबीएसई परीक्षा तैयारियों की समीक्षा में इम्तिहान रद करने का निर्णय लिया और मंगलवार को ही कुछ अंतराल में सीआइएससीई ने भी इंटर की परीक्षाएं रद करने का ऐलान कर दिया।

सीबीएसई की इंटर परीक्षा में देशभर में 14.3 लाख ही परीक्षार्थी हैं और यूपी में करीब दो लाख। वहीं, यूपी बोर्ड की इंटर परीक्षा में कुल परीक्षार्थियों की तादाद 26 लाख से अधिक है। इस संख्या के हिसाब से छात्र-छात्रओं की महामारी में सुरक्षा करने की सबसे अधिक चिंता यूपी बोर्ड को ही करनी है। यह भी अहम है कि यूपी बोर्ड की इंटर परीक्षा 2020 में 25.86 लाख परीक्षार्थी ही पंजीकृत रहे हैं, पिछले वर्ष से करीब 23 हजार अधिक हैं। बोर्ड का पंजीकरण कोरोना संक्रमण में इंटर में बढ़ा है।

10 वर्ष के इंटर के परिणाम

वर्ष उत्तीर्ण प्रतिशत

2010 80.54

2011 80.14

2012 89.40

2013 92.68

2014 92.21

2015 88.83

2016 87.99

2017 82.62

2018 72.43

2019 70.06

2020 74.63