पढ़ाई में अब नहीं अखरेगी किताबों की कमी

नई दिल्ली: लॉकडाउन के बीच घरों में बैठे बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई तो शुरू हो गई है, लेकिन स्कूल और बाजार सब बंद होने से उनके सामने किताबों के न मिलने की एक बड़ी समस्या थी। एनसीईआरटी ने स्कूली बच्चों की इस दिक्कत को भी दूर कर दिया है। उन्हें सारी किताबें अब घर बैठे ऑनलाइन मिल जाएंगी। एनसीईआरटी ने इसे लेकर ई-बुक्स डैश एनसीईआरटी नाम से एक पोर्टल जारी किया है। खास बात यह है कि इस पोर्टल पर कक्षा एक से लेकर बारहवीं तक के सभी विषयों की चालू सत्र की नई किताबें क्यूआर कोड के साथ उपलब्ध हैं। छात्र पूरी किताब एक साथ डाउनलोड कर सकते हैं। या फिर वे एक-एक चैप्टर भी डाउनलोड कर सकते हैं।

सभी चैप्टर का भी क्यूआर कोड दिया गया है। इसके साथ ही सभी राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों के लिए तैयार की गई एनसीईआरटी की किताबों को भी इस पोर्टल के जरिये ऑनलाइन किया गया है। बता दें कि अभिभावकों की ओर से भी किताबों को उपलब्ध कराने की मांग की गई थी, जिसके बाद एनसीईआरटी ने यह पहल की है। इस बीच स्कूली बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई है। यह टेलीविजन के अलावा यूट्यूब, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया के जरिये लाइव आयोजित की जा रही है। इसके साथ स्कूलों की ओर से अलग-अलग विषयों के शिक्षक वीडियो तैयार कर छात्रों को सीधे भी भेज रहे हैं। वहीं मंत्रलय के स्तर पर ऑनलाइन पढ़ाई की लगातार मॉनीटरिंग भी हो रही है।

पढ़े भारत ऑनलाइन मुहिम को तीन दिन में मिले भारी सुझाव: मानव संसाधन विकास मंत्रलय की ओर से ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए छेड़ी गई पढ़े भारत ऑनलाइन मुहिम को भी इस दौरान काफी सुझाव मिल रहे हैं। मुहिम को पहले ही तीन दिनों में करीब 37 सौ लोगों ने सुझाव दिए हैं। इसके साथ ही यह ट्विटर पर ट्रेंड करने वाले टॉप-10 विषयों में भी शामिल है।

मंत्रलय ने इसे लेकर फिलहाल 16 अप्रैल तक लोगों से सुझाव देने को कहा है। बता दें कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने 10 अप्रैल को इस मुहिम को लांच किया था। साथ ही संकेत दिया था कि भविष्य में ऑनलाइन पढ़ाई को बडे स्तर पर शुरू किया जाएगा। इससे पहले मंत्रलय ने ऑनलाइन परीक्षा को लेकर भी एक कमेटी गठित की।

एनसीईआरटी ने पहली से बारहवीं तक की सभी विषयों की नई किताबें कीं ऑनलाइन

’>>प्रत्येक चैप्टर का क्यूआर कोड भी किया जारी, आसानी से हो सकेगा डाउनलोड

’>>लॉकडाउन के चलते स्कूल और बाजार सब बंद होने से नहीं मिल रही थीं किताबें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.