प्रतियोगी उप्र लोक सेवा आयोग के वॉश आउट की कर रहे हैं मांग

एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती के पेपर लीक कांड पर आंदोलन कर रहे प्रतियोगी उप्र लोक सेवा आयोगके वॉश आउट की पुरजोर मांग कर रहे हैं। मामले में आरोपित भले ही परीक्षा नियंत्रक हैं लेकिन, भ्रष्टाचार की छींटे कई अधिकारियों यहां तक कर्मचारियों तक पड़ रही हैं। सूत्रों की मानें तो शासन आयोग को लेकर इन दिनों गंभीर है। मुख्यमंत्री ने अफसरों से जिस तरह की प्रतिक्रिया दी है, उसका असर जल्द दिख सकता है।

योगी सरकार ने सत्ता में आने के बाद 22 मार्च 2017 को यूपीपीएससी का कामकाज रोक दिया था। उस समय आयोग सचिव स्वायत्तता का हवाला देकर इस कार्रवाई का दबी जुबान विरोध कर रहे थे। सरकार ने सचिव व परीक्षा नियंत्रक के अलावा छिटपुट पदों पर ही बदलाव किया। कुछ माह बाद रोकी गई प्रक्रिया फिर बहाल हो गई। हालांकि चयन प्रक्रिया बहाल होते ही पांच साल की भर्तियों की सीबीआइ जांच का एलान हो गया। आयोग के जानकारों की मानें तो सरकार ने यूपीपीएससी को छेड़ा जरूर लेकिन, बदलाव एक दायरे तक ही सीमित रहा। सीबीआइ जांच रुकवाने के लिए यूपीपीएससी शीर्ष कोर्ट तक पहुंचा लेकिन, राहत नहीं मिली। सरकार ने सीबीआइ जांच को ही बड़ा हथियार माना और एक तरह से आयोग से किनारा कर लिया। सीबीआइ अब तक बेहतर कर नहीं सकी है। अफसर मनमाने तरीके से कार्य करते गए और भ्रष्टाचार सामने आया। अब शासन आयोग में तैनात अफसरों व अन्य की गतिविधियों पर गंभीर है।

यूपीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष केबी पांडेय कहते हैं कि आयोग सांविधानिक संस्था है, इसलिए नियुक्त अध्यक्ष, सदस्य और यूपीपीएससी केंद्रित कर्मचारियों (जिनका चयन ही आयोग के लिए हुआ) के सिवा अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों को कभी भी और कहीं भी भेज सकती है। आयोग में बड़ी संख्या में संयुक्त सचिव, समीक्षा अधिकारी, एआरओ आदि तैनात हैं, इन्हें सरकार जब चाहे यहां से हटाकर अन्य जगह पर तैनाती दे सकती है। माना जा रहा है कि बड़े बदलाव के लिए अब तक नए परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति नहीं हुई है।

अन्य संस्थानों में नहीं हुआ बदलाव: प्रयागराज में अन्य भर्ती संस्थान माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड, उच्चतर शिक्षा आयोग व परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय में गड़बड़ियों के मामले खुलने पर वॉश आउट की तैयारी हुई लेकिन, प्रकरण ठंडा होते ही अधिकारी व कर्मचारी इधर-उधर नहीं किए गए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.