स्कूली बच्चों के भोजन की थाली अब न सिर्फ पहले से ज्यादा स्वादिष्ट होगी

  

स्कूली बच्चों के भोजन की थाली अब न सिर्फ पहले से ज्यादा स्वादिष्ट होगी, बल्कि इनमें विटामिन और दूसरे पौष्टिक तत्वों की उपलब्धता भी रहेगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्रलय ने इसे लेकर एक बड़ी योजना बनाई है। इसके तहत स्कूली बच्चों का खाना बनाने वाले रसोइयों (कुक कम हेल्पर) को प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्हें यह प्रशिक्षण स्वास्थ्य मंत्रलय से जुड़ी संस्था एफएसएसएआई देगी। फिलहाल यह योजना देशभर में नए साल से यानी जनवरी से शुरू होगी।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रलय से जुड़े अधिकारियो के मुताबिक योजना के पहले चरण में देश के करीब चार सौ जिलों में इसे लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक जिले में स्कूलों में खाने बनाने वाले करीब पचास-पचास रसोइयों को प्रशिक्षित किया जाएगा। जिन्हें मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा। बाद में इनमें से खाने को सबसे ज्यादा स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाने वाले रसोइयों के जरिये जिले के बाकी सभी रसोइयों को प्रशिक्षित किया जाएगा। फिलहाल योजना है कि स्कूल अब जैसे ही खुले बच्चों को एफएसएसएआइ के मापदंडों के अनुरूप ही स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन परोसा जाए। फिलहाल स्कूली बच्चों के लिए चलाई जा रही मिड-डे मील स्कीम से देश भर के करीब 12 करोड़ बच्चे जुड़े हैं।

फिलहाल इस पूरी योजना के तहत बच्चों को बेहतर गुणवत्ता के साथ स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना मकसद है। योजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा समय में स्कूली बच्चों के खाने की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए सभी तरह की बेहतर सामग्रियां तो उपलब्ध कराई जा रही हैं, लेकिन जब तक इसे बनाने वाला बेहतर न हो, इसका कोई मतलब नहीं रह जाता है। खास कर खाना बनाने वाले को यह जानकारी होनी चाहिए कि किस सब्जी को कैसे बनाया जाए, जिससे उसके पोषक तत्व नष्ट नहीं हों। या फिर खाने को स्वादिष्ट व बच्चों के अनुकूल बनाने के लिए कैसे तैयार किया जाए, जो उन्हें पसंद आए। अभी स्कूलों में खाना बनाने वाले इन रसोइयों के पास ऐसी कोई विशेषज्ञता या समझ नहीं है। खास बात यह है कि मिड-डे मील स्कीम के तहत स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल में ही गरमा-गरम खाना बनाकर खिलाया जाता है। इसकी गुणवत्ता पर स्कूल के शिक्षक और स्थानीय अभिभावक नजर रखते हैं।

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