यूपी मदरसा शिक्षा परिषद से अब नहीं मिलेगी मुंशी-मौलवी और आलिम की डिग्री

यूपी मदरसा शिक्षा परिषद में मुंशी-मौलवी व आलिम नाम से डिग्री न देने का फैसला योगी सरकार ने किया है। अब मुंशी-मौलवी की परीक्षा सेकेंडरी नाम से जानी जाएगी। आलिम की परीक्षा का नाम सीनियर सेकेंडरी होगा। ये फैसला इसलिए लिया जा रहा है ताकि अन्य बोर्ड की तरह मदरसा बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा में कोई भ्रम न रहे।

अक्सर उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की डिग्रियों को लेकर भ्रम बना रहता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में मदरसा बोर्ड की भ्रम पैदा करती है, कौन सी डिग्री किसके समकक्ष है इसे लेकर स्थिति साफ नहीं रहती है। डिग्रियों के बारे में मदरसा बोर्ड से हर बार पूछा जाता है। डिग्रियों को लेकर भ्रम इसलिए भी रहता है क्योंकि मदरसा बोर्ड की यह परीक्षाएं हैं तो हाईस्कूल व इंटरमीडिएट स्तर की लेकिन इन्हें डिग्री बोला जाता है।

मदरसा बोर्ड ने इसी समस्या को देखते हुए अपनी डिग्रियों के नाम बदलने का फैसला किया है। चूंकि मुशी-मौलवी परीक्षा हाईस्कूल परीक्षा के समकक्ष होता है। इसलिए अब इसका नाम सेकेंडरी (मुंशी/मौलवी) होगा। इसी तरह आलिम इंटरमीडिएट परीक्षा के समकक्ष होगी। इसलिए इसका नया नाम सीनियर सेकेंडरी (आलिम) होगा।

मदरसा बोर्ड की पाठ्यक्रम समिति ने इन डिग्रियों के नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। पाठ्यक्रम समिति के सदस्यों ने कहा कि वर्तमान समय में ऐसा करना जरूरी है। बोर्ड के रजिस्ट्रार एवं पाठ्यक्रम समिति के सदस्य सचिव एसएन पाण्डेय ने बताया कि नाम बदले जाने से अब मदरसा बोर्ड के छात्र भी प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा ले सकेंगे। अब इनकी मार्कशीट में ऊपर सेकेंडरी व सीनियर सेकेंडरी लिखा रहेगा।

आंतरिक मूल्यांकन की भी व्यवस्था : यूपी बोर्ड सहित अन्य बोर्ड की तरह अपने यहां भी सतत एवं आंतरिक मूल्यांकन की नई व्यवस्था शुरू करने जा रहा है। इसमें हाईस्कूल की परीक्षा में 20 प्रतिशत अंक आंतरिक मूल्यांकन के होंगे। इंटरमीडिएट स्तर की परीक्षा में 30 फीसद अंक आंतरिक मूल्यांकन के लिए निर्धारित किए गए हैं। यानी 70 से 80 फीसद अंक ही बोर्ड की मुख्य परीक्षा के होंगे। इस व्यवस्था से मदरसों के छात्र-छात्रओं का सतत मूल्यांकन हो सकेगा। उन्हें भी प्रोजेक्ट वर्क दिए जाएंगे।

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