अब यूपी बोर्ड में प्रवेश लेना आसान नहीं होगा

प्रयागराज : अब अभिलेखों में हेराफेरी कर यूपी बोर्ड में प्रवेश लेना आसान नहीं होगा। क्योकि बोर्ड प्रशासन फर्जीवाड़ा रोकने के लिए एक बड़ी पहल की है। बोर्ड प्रशासन ने यूपी सहित आसपास प्रदेशों के बोर्ड से उन छात्र-छात्रओं का ब्योरा मांगा है जोकि 10वीं व 12वीं परीक्षा में अनुत्तीर्ण हुए हैं. या फिर 9वीं व 11वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है. यूपी बोर्ड पहले छात्र-छात्रओं के डोक्युमेंट का मिलान करेगा फिर उनको हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देगा। अभिलेखों में गड़बड़ मिलने पर परीक्षा के पहले ही बाहर किया जाएगा।

यूपी बोर्ड के सचिव ने आसपास के प्रदेशों के बोर्ड निदेशक, सचिव व परीक्षा नियंत्रक को पत्र भेजकर अनुरोध किया कि वे अपने यहां 2015 से लेकर 2019 की 10वीं व 12वीं परीक्षा में अनुत्तीर्ण और 9वीं व 11वीं की परीक्षा में उत्तीर्ण छात्र-छात्रओं का डाटा उपलब्ध करा दें। दूसरे बोर्ड के अनुत्तीर्ण अभ्यर्थी अभिलेखों में हेरफेर करके यूपी बोर्ड में प्रवेश लेने की जुगत करते आ रहे हैं।

83753 को कर चुके बाहर : यूपी बोर्ड 2018 की हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा में 83753 छात्र-छात्रओं ने फर्जी अभिलेखों के आधार पर प्रवेश लिया था, 2019 की परीक्षा में यह संख्या करीब 15 हजार रही जबकि 2017 की परीक्षा में कई परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए उनका रिजल्ट रोकना पड़ा था।

इन बोर्डो से मांगी गई रिपोर्ट

सीबीएसई नई दिल्ली, काउंसिल फार द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन नई दिल्ली, उप्र मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ, माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद उप्र, उत्तराखंड, पटना, भोपाल, अजमेर, मोहाली, हरियाणा, कांगड़ा, रांची, कोलकाता, नेशनल ओपेन स्कूल दिल्ली।

अंकों व जन्म तारीख बदलना

यूपी बोर्ड की जांच में सामने आ चुका है कि दूसरे बोर्ड के परीक्षार्थी हाईस्कूल व इंटर में अंक बढ़ाने या फिर जन्म तारीख को कम कराने के लिए जाली प्रपत्रों का सहारा लेकर प्रवेश लेते रहे हैं। शिक्षा बोर्ड से रिकॉर्ड मिलने पर यह कुप्रयास विफल कर दिया जाएगा।

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विवरण की होगी जांच यूपी बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव ने बताया कि शिक्षा बोर्डो को प्रोफार्मा भेजकर रिपोर्ट मांगी है, प्रवेश के बाद उनकी जांच कराएंगे। गड़बड़ मिलने पर सभी को बाहर किया जाएगा। .

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