पढ़ाई के लिए माध्यमिक विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षक नहीं

आज सरकार परिषदीय विद्यालयों में भी लैपटॉप, टैबलेट और स्मार्ट फोन से बच्चों की पढ़ाई पर जोर दे रही है, लेकिन माध्यमिक विद्यालयों के छात्र-छात्रओं के लिए ऐसे कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं। माध्यमिक के विद्यार्थियों को कंप्यूटर पढ़ाने के लिए करीब 10 साल पहले एक योजना शुरू की गई, पर स्थायी शिक्षकों के बगैर वह भी असफल हो गई। ज्यादातर विद्यालयों में मानदेय पर भी शिक्षक नहीं हैं, जिससे छात्र-छात्रएं कंप्यूटर ज्ञान से वंचित हो रहे हैं।

लगभग 10 वर्ष पूर्व छात्र-छात्रओं को कंप्यूटर की सामान्य जानकारी देने के मकसद से यूपी बोर्ड के विद्यालयों में कंप्यूटर पढ़ाई की व्यवस्था शुरू की गई। इसके लिए प्रदेश स्तर पर एक एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई। एजेंसी ने यहां के कई बड़े विद्यालयों में 10 कंप्यूटरों की लैब तैयार करा दी। एजेंसी ने ही मानदेय पर computer teacher को नियुक्त किया और वेतन का भुगतान भी करती थी। लेकिन यह व्यवस्था कुछ ही दिन चल पाई। एजेंसी भाग गई। लिहाजा, शिक्षकों का भुगतान बंद हो गया तो वे धीरे-धीरे करके हटते गए। कंप्यूटर की पढ़ाई के लिए शासन से छात्र-छात्रओं से फीस न लेने के निर्देश थे। लिहाजा, विद्यालयों के प्रबंधन ने भी शिक्षकों को रखने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। स्थिति यह है कि ज्यादातर विद्यालयों में कंप्यूटर धूल फांक रहे हैं। मेंटिनेंस न होने से लैब भी बर्बाद हो गए हैं।

कंप्यूटर के स्थायी शिक्षक पूरे प्रदेश में नहीं रखे गए। मेंटिनेंस न होने से करीब 99 फीसद विद्यालयों के कंप्यूटर लैब बर्बाद हो गए हैं। जैसे-तैसे टीचरों से कक्षाएं चलाई जा रही हैं।  देवेंद्र सिंह, प्रधानाचार्य जीआइसी

कुछ विद्यालयों में अपने स्रोतों से शिक्षकों की तैनाती की कोशिश हुई, लेकिन अड़ंगा लगने से शिक्षक नहीं रखे जा सके। अगर सरकार शिक्षकों को रख दे तो कंप्यूटर की पढ़ाई होने लगे। कंप्यूटर आज की जरूरत है। – डॉ. योगेश त्रिपाठी, भारत स्काउट एंड गाइड इंटर कॉलेज

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