डीएलएड में पढ़ाए जाने वाले संस्कृत विषय का नया पाठ्यक्रम तैयार

वाराणसी स्थित राज्य हिन्दी संस्थान डीएलएड (बीटीसी) में पढ़ाए जाने वाले संस्कृत विषय का नया पाठ्यक्रम तैयार कर रहा है। नई शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में पाठ्यक्रम को संशोधित करने की जिम्मेदारी स्टेट काउंसिल एजुकेशनल एंड रिसर्च ट्रेनिंग (एससीईआरटी) ने संस्थान को सौंपी है।

एससीईआरटी से निर्देश मिलने के बाद संस्थान ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए रिसोर्स पर्सन की सूची तैयार की जा रही है। पाठ्यक्रम निर्माण में जिन विशेषज्ञों से मार्गदर्शन मिल सकता है। उनसे सम्पर्क किया जा रहा है। संस्थान उन डायट प्रवक्ताओं की मदद लेगा, जो अपने यहां डीएलएड में संस्कृत विषय का अध्यापन करते हैं। इसके अलावा प्रशिक्षुओं से भी फीडबैक लिया जाएगा। उनसे यह जानने की कोशिश होगी कि अभी जो पाठ्यक्रम हैं, उसमें कहां तक फेरबदल किया जा सकता है। उसमें क्या नया जोड़ा जा सकता है। अभी जो पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है, उसमें क्या कमी है।

नई शिक्षा नीति में भारतीय मातृ भाषाओं को काफी महत्व दिया गया है। इनमें संस्कृत भी शामिल है। डीएलएड कोर्स करने वाले ही प्राइमरी विद्यालयों में शिक्षक भर्ती के लिए अर्ह होते हैं। इसलिए शिक्षक प्रशिक्षण के कोर्स को महत्वपूर्ण मानते हुए इन डीएलएड में संस्कृत विषय के पाठ्यक्रम में बदलाव किया जा रहा है। राज्य हिन्दी संस्थान ही संस्कृत की पाठ्य पुस्तकें भी तैयार करता है। डीएलएड के अन्य विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव हो रहे हैं, मगर संस्कृत की जिम्मेदारी राज्य हिन्दी संस्थान को दी गई है। संस्थान की निदेशिका डॉ. ऋचा जोशी ने बताया कि एससीईआरटी के निर्देश पर जल्द ही संशोधन की प्रक्रिया शुरू होगी। पाठ्यक्रम को संशोधित कर एससीईआरटी को भेजा जाएगा। एससीईआरटी के विशेषज्ञ भी इसका परीक्षण करेंगे। उसमें आवश्यकतानुसार बदलाव करेंगे। इसके बाद ही नए पाठ्यक्रम का प्रारूप तैयार होगा।

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