सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के शिक्षा मित्रों को दिया बड़ा झटका

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर यूपी शिक्षा मित्रों को बड़ा झटका दिया है। शिक्षा मित्रों का सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजन रद करने वाले फैसले के खिलाफ दाखिल क्यूरेटिव याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट 30 जनवरी 2018 को पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर चुका है। यह पूरा प्रकरण यूपी के 172000 शिक्षा मित्रों को सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजित किये जाने का था।

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ की ओर से दाखिल क्यूरेटिव याचिका को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, एसए बोबडे, एनवी रमना और यूयू ललित की पीठ ने गत छह अगस्त को खारिज कर दिया था, लेकिन वेबसाइट पर फैसला बाद मे उपलब्ध हुआ। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि उन्होंने याचिका और उसके साथ दाखिल दस्तावेजों पर गौर किया जिसमें पाया कि यह मामला क्यूरेटिव याचिका पर विचार करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में तय मानकों में नहीं आता इसलिए याचिका खारिज की जाती है।

शिक्षा मित्रों ने पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद क्यूरेटिव याचिकाएं दाखिल की थीं। संघ के वकील गौरव यादव का कहना है कि कोर्ट का जो भी फैसला है हमें स्वीकार है लेकिन वे शिक्षामित्रों के हित में राज्य सरकार से गुहार जारी रखेंगे।

क्या है मामला  यूपी सरकार ने 26 मई 1999 को एक आदेश जारी किया जिसके आधार पर शिक्षा मित्रों की नियुक्ति हुई। ये नियुक्तियाँ सर्व शिक्षा अभियान के तहत शिक्षक और छात्रों का अनुपात सही करने और सभी को समान प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई। इन नियुक्तियाँ की शैक्षिक योग्यता भी कम थी और कम वेतन पर हुईं। संविदा आधारित नियुक्तियाँ थी।

सरकार ने 1 जुलाई 2001 को एक और आदेश निकाला और शिक्षामित्र योजना को और विस्तृत किया। 172000 शिक्षामित्रों को जून 2013 में सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजित करने का निर्णय लिया गया। हाईकोर्ट सरकार के फैसले को चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों का समायोजन रद कर दिया। जिसके खिलाफ सरकार और शिक्षा मित्र सुप्रीम कोर्ट गए। कोर्ट में मामला लंबित रहने के दौरान 172000 में से लगभग 138000 शिक्षामित्र सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजित हो चुके थे जिन्हें आदेश से झटका लगा था।

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