पहले ही दिन यूपी बोर्ड के 2.39 लाख से अधिक ने परीक्षा छोड़ी

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा 2020 मंगलवार से शुरू हो गई। पहले ही दिन 2.39 लाख से अधिक ने इम्तिहान से किनारा कर लिया। इससे भी अहम बात यह है कि ये परीक्षार्थी मातृभाषा हिंदी के अनिवार्य प्रश्नपत्र की परीक्षा देने नहीं पहुंचे। वहीं, बोर्ड प्रशासन ने भी इंटर की सामान्य हिंदी की परीक्षा में पहला ही सवाल ऐसा पूछा जिसके सभी उत्तर विकल्प गलत हैं। यह जरूर है कि केंद्रों की निगरानी वेब कॉस्टिंग के जरिए होने से परीक्षार्थी व कक्ष निरीक्षकों में खलबली रही।

माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड की परीक्षा प्रदेश के 7784 केंद्रों पर शुरू हुई। 56 लाख से परीक्षार्थियों को शामिल होना था, लेकिन पहली पाली में हाईस्कूल की प्रारंभिक हिंदी की परीक्षा देने 1,57,042 परीक्षार्थी पहुंचे ही नहीं। दूसरी पाली में इंटर सामान्य हिंदी की परीक्षा से 82,091 परीक्षार्थियों ने किनारा कर लिया। पहले दिन कुल 2,39,133 परीक्षार्थियों के इम्तिहान छोड़ने की जानकारी यूपी बोर्ड ने दी। यह संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि इंटर की परीक्षा शाम पांच बजे तक चली है, जिससे सभी केंद्रों से ऑनलाइन गैरहाजिर परीक्षार्थियों की संख्या अपलोड नहीं हो सकी थी। ज्ञात हो कि पिछले वर्ष परीक्षा छोड़ने वालों का आंकड़ा 12 लाख तक पहुंच गया था। 2019 की हाईस्कूल व इंटर परीक्षा में हिंदी विषय में अनुत्तीर्ण होने वालों की संख्या 10 लाख रही है।

बोर्ड प्रशासन के अनुसार पहले दिन परीक्षा नकलविहीन व शांतिपूर्ण हुई। परीक्षार्थियों की तलाशी के बाद केंद्र पर प्रवेश दिया गया। सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी रही। कौशांबी में एक केंद्र पर कैमरे न चलने पर अफसरों ने केंद्र व्यवस्थापक को डांट लगाई।

पहले प्रश्न पर ही किरकिरी : इंटर की सामान्य हिंदी की परीक्षा में प्रश्नपत्र क्रमांक 302 जेडजे का पहला प्रश्न कल्पलता के लेखक कौन हैं? इसके चार उत्तर विकल्प में महावीर प्रसाद द्विवेदी, प्रो. जी. सुंदर रेड्डी, वासुदेव शरण अग्रवाल व प्रेमचंद्र का नाम था। यह निबंध संग्रह हजारी प्रसाद द्विवेदी का लिखा हुआ है। एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज प्रयागराज के हंिदूी शिक्षक डॉ. अनुपम परिहार का कहना है कि पहले प्रश्न के उत्तर विकल्प गलत हैं। सही जवाब हजारी प्रसाद द्विवेदी ही है। वहीं, पश्चिम के जिलों में हंिदूी के प्रश्नपत्र में अन्य गड़बड़ियां भी मिली हैं।

बोर्ड के अपर सचिव शिवलाल का कहना है कि उन्होंने अभी प्रश्नपत्र नहीं देखा है, जब उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन होगा तो इसका परीक्षण कराया जाएगा और विशेषज्ञ इसका विकल्प तय करेंगे।

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