वापस हुए 1.25 करोड़ रुपये बच्चों की शिक्षा पर नहीं खर्च हो सके

  

शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत मान्यता प्राप्त निजी कॉन्वेंट स्कूलों में गरीबों के बच्चे अच्छी शिक्षा ग्रहण कर सकें, इसके लिए सरकार करोड़ों रुपये का बजट जारी करती है लेकिन स्कूल प्रबंधन और बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों की मिलीभगत से इन स्कूलों में पर्याप्त संख्या में बच्चों को दाखिला नहीं मिला। सो, सरकार की ओर से जारी रकम में से 1.25 करोड़ रुपये वापस कर दी गई।

आरटीई के तहत निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों में उन गरीब बच्चों का दाखिला होता है, जिनका नाम शासन की ओर से ऑनलाइन लॉटरी में आने के बाद डीएम की ओर से संस्तुति की जाती है। इसके बाद स्कूलों में जितने बच्चों का प्रवेश होता है, 450 रुपये प्रतिमाह की दर से फीस स्कूलों को भेजी जाती है, जबकि किताब, यूनिफार्म आदि के लिए प्रत्येक बच्चे के अभिभावक के बैंक खाते में पांच हजार रुपये सालाना की दर से ट्रांसफर किया जाता है। इस मद में तीन शैक्षिक सत्रों के लिए विभाग को 2 करोड़ 27 लाख 55 हजार रुपये मिले थे। इसमें से शैक्षिक सत्र 2016-17, 17-18 और 18-19 के लिए शुल्क प्रतिपूर्ति व अनुदान मद में एक करोड़ तीन लाख 10 हजार 243 रुपये खर्च हुए। एक करोड़ 24 लाख 44 हजार 757 रुपये खर्च नहीं किए जा सके। कहा जा रहा है कि 10 स्कूलों द्वारा दाखिला लिए गए बच्चों की संख्या सत्रवार तय प्रारूप पर नहीं भेजी गई, जिसकी वजह से इन स्कूलों को शुल्क प्रतिपूर्ति और वित्तीय सहायता नहीं मुहैया कराई जा सकी। लिहाजा, बजट खर्च नहीं हो सका। बची रकम 30 मार्च को वापस कर दी गई।

दाखिले के लिए लॉटरी आज : इस शैक्षिक सत्र में आरटीई के तहत निजी मान्यता प्राप्त कॉन्वेंट स्कूलों में दाखिले के लिए 1899 बच्चों ने ऑनलाइन आवेदन किए हैं। 1102 आवेदन स्वीकृत हुए हैं, 797 आवेदन निरस्त हो गए हैं। बच्चों के दाखिले को शासन स्तर से ऑनलाइन लॉटरी बुधवार को निकलेगी।

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