प्रदेश में अब साधारण मदरसों के बजाय मॉडर्न मदरसों को ही मिलेगी मान्यता

मदरसा शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के लिए योगी सरकार ने एक और बड़ा निर्णय किया है। राज्य में अब साधारण मदरसों के बजाय मॉडर्न मदरसों को ही मान्यता दी जाएगी। मॉडर्न यानी ऐसे मदरसे जिनमें अरबी/फारसी व उर्दू के साथ ही आधुनिक विषयों हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान व सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई हो। इन मदरसों में 12 शिक्षकों में से नौ शिक्षक आधुनिक विषयों के होंगे। यह मदरसे निजी क्षेत्र में खुलेंगे।

यूपी मदरसा शिक्षा परिषद ने पिछले कुछ समय से नए मदरसों को मान्यता नहीं दी है। नए मदरसों को इसलिए मान्यता नहीं दी गई, क्योंकि बोर्ड यह चाहता है कि पुराने मदरसों को पहले व्यवस्थित कर लिया जाए। अब मदरसा बोर्ड ने प्रदेश में मॉडर्न मदरसों को ही मान्यता देने का निर्णय किया है। बोर्ड का मानना है कि इससे मदरसा शिक्षा में गुणात्मक सुधार के साथ ही शैक्षिक स्तर बढ़ेगा।

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मदरसा शिक्षा परिषद की पाठ्यक्रम समिति ने आधुनिक मदरसों के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। जल्द ही इसके आदेश जारी हो जाएंगे। अभी मान्यता प्राप्त मदरसों में एक प्रिंसिपल, एक लिपिक व एक चपरासी के साथ ही 12 शिक्षक होते हैं। इनमें से केवल तीन शिक्षक वैकल्पिक यानी आधुनिक विषयों के होते हैं।

मॉडर्न मदरसों का प्रारूप:

इसमें 12 में से नौ शिक्षक आधुनिक विषयों के होंगे। मदरसों को प्राइमरी, जूनियर व हायर सभी में तीन-तीन शिक्षक आधुनिक विषयों के रखने होंगे। मॉडर्न मदरसों में केवल तीन शिक्षक अरबी/फारसी व उर्दू विषयों को पढ़ाने वाले होंगे। वर्तमान में मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत आधुनिक विषय पढ़ाए जाते हैं। बोर्ड ने इन्हें वैकल्पिक विषय के रूप में रखा है। अब बोर्ड वैकल्पिक विषयों को आधुनिक विषय बनाकर अनिवार्य करने जा रही है।

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मदरसा बोर्ड चाहता है कि उसके यहां के छात्र-छात्रएं दूसरे शिक्षा बोर्ड के छात्र-छात्रओं के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। इसके लिए मदरसों में कंप्यूटर शिक्षा के साथ ही वोकेशनल ट्रेनिंग भी अनिवार्य की जा रही है। आधुनिक शिक्षा से मदरसों के छात्र-छात्रओं को न सिर्फ रोजगार के अवसर मिलेंगे बल्कि वे स्वावलंबी भी बनेंगे।

मान्यता प्राप्त मदरसा : तहतानिया (प्राइमरी) व फौकानिया (जूनियर)-14,677,  आलिया (हाईस्कूल व इंटर)-4,536, अनुदानित -560

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