कोरोना संकट के बीच स्कूलों को खोलने पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अभिभावकों मांगी राय

कोरोना संकट के बीच स्कूलों को खोलने का फैसला अब अभिभावकों की राय से ही होगा. मानव संसाधन विकास मंत्रलय ने फिलहाल यह फैसला अभिभावकों पर ही छोड़ने का निर्णय लिया है. इसके तहत अभिभावकों को बताना होगा कि वह स्कूल कब खुलवाना चाहते हैं- अगस्त, सितंबर या फिर अक्टूबर में. साथ ही स्कूलों के खुलने के बाद उनकी स्कूलों से क्या अपेक्षाएं होंगी.

मंत्रलय की इस कवायद को एक अगस्त से अनलॉक- 3 की गाइडलाइन से भी जोड़कर देखा जा रहा है. वैसे भी अनलॉक-2 के तहत जारी गाइडलाइन की समयसीमा 31 जुलाई तक ही है जिसमें स्कूलों को बंद रखने के निर्देश थे. ऐसे में मंत्रलय की इस कवायद को काफी अहम माना जा रहा है. माना जा रहा है कि इसके आधार पर ही अनलॉक-3 में स्कूलों के खोलने को लेकर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी.

मंत्रलय ने 17 जुलाई को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्कूली शिक्षा सचिवों को पत्र लिखकर अभिभावकों से स्कूलों के खोलने को लेकर राय जानने को कहा था. इसमें अभिभावकों से तीन सवाल ही पूछे जाने थे.

पहला- स्कूलों को वह अगस्त, सितंबर या अक्टूबर 2020 में कब खुलवाना पसंद करेंगे. दूसरा-स्कूलों के खुलने के बाद उनकी स्कूलों से क्या अपेक्षाएं होंगी. तीसरा- वह इसे लेकर अपनी कोई भी स्वतंत्र राय दे सकते हैं. मंत्रलय ने राज्यों से अभिभावकों की राय से जुड़ी यह पूरी रिपोर्ट 20 जुलाई तक देने को कहा था.

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